पवित्र रमज़ान की "शबे क़द्र" नामक रात से क्रिस्टीना की ज़िन्दगी बदल गयी



रमज़ान का पवित्र महीना समस्त मुसलमानों विशेषकर ताज़ा इस्लाम धर्म स्वीकार करने वाले लोगों के लिए आध्यात्मिक आकर्षण का कारण है। यह वह पवित्र महीना है जिसमें महान ईश्वर दूसरे महीनों की अपेक्षा सब पर विशेषकर अपने बंदों पर विशेष कृपा करता है। अमेरिकी महिला क्रिस्टिना जैसे कुछ लोगों ने पवित्र रमज़ान महीने की आध्यात्मिक बरकतों व विशेषताओं से प्रभावित होकर इस्लाम धर्म स्वीकार किया है। अमेरिकी महिला क्रिस्टिना पवित्र रमज़ान महीने की विशेष रातों यानी शबे क़द्र को मस्जिद में जाती हैं और यही उनके अंदर परिवर्तन का आरंभ बिन्दु बन जाता है। उनका जन्म एक कैथोलिक ईसाई परिवार में हुआ था और उसी में वह पली- बढ़ी और उसी में उनकी प्रशिक्षा हुई थी।

क्रिस्टीना महान व सर्वसमर्थ ईश्वर से अपने संबंधों के बारे में कहती हैं। मैं हमेशा इस बात का आभास करती थी कि ईश्वर से मैं विशेष संबंध रखती हूं। यह संबंध हमेशा उस तरह से था जैसे कोई अपने पिता या किसी महान हस्ती से संबंध रखता है। जब मैं गिरजाघर जाती और प्रार्थना करती थी तो वह मेरे लिए बहुत ही अच्छा व आध्यात्मिक संपर्क का समय होता था। इस प्रकार का आध्यात्मिक संबंध हमेशा था।

हर धर्म में जो धार्मिक नेता और धर्मगुरू होते हैं वह उस धर्म के मानने वालों के लिए आदर्श होते हैं। इस आधार पर जब इन नेताओं व धर्मगुरूओं से किसी प्रकार की ग़लती हो जाती है तो इससे न केवल उनका आध्यात्मिक स्थान व महत्व कम हो जाता है बल्कि उस धर्म के मानने वालों और स्वयं उस धर्म पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। खेद के साथ कहना पड़ता है कि ईसाई धर्म में कई दशकों से इस प्रकार की घटनायें पेश आ रही हैं और हर कुछ समय पर पादरियों पर बच्चों के साथ दुराचार, यौन उत्पीड़न और शोषण की ख़बरें सुनने को मिलती हैं और पादरियों को उनके पदों से हटाकर उन पर मुकद्दमा चलाया जाता है। पादरियों का यह कृत्य बहुत से ईसाईयों की धार्मिक आस्थाओं के कमज़ोर होने का कारण बना है, यही नहीं बहुत से ईसाईयों का अपने धर्म से दिल उचट गया है और वे केवल नाममात्र के ईसाई हैं और ईसाई धर्म और उसकी शिक्षाओं के लिए उनके दिलों में कोई स्थान नहीं है।

क्रिस्टीना के माता- पिता वर्षों से गिरजाघर जाते और धार्मिक समारोहों में भाग लेते थे मगर जब से कैथोलिक ईसाईयों के गिरजाघर में नैतिक भ्रष्टाचार के मामलों के सामने आने का क्रम आरंभ हुआ है तब से उन्होंने गिरजाघर जाना छोड़ दिया है। क्रिस्टिना का भी दिल अपने धर्म से उचट गया है और उन्हें अपने धर्म से कोई विशेष लगाव नहीं रह गया था। वह इस आध्यात्मिक शून्य को भरने वाले मार्ग की खोज में थीं कि ईश्वरीय धर्म इस्लाम को उन्होंने अपनेआअध्यात्मिक शून्य को भरने वाला पाया।


स्कूल में क्रिस्टीना की दोस्ती कुछ मुसलमान छात्र-छात्राओं से हो जाती है और जब वह विश्वविद्यालय में दाख़िला ले लेती हैं तो उनके दोस्त ईश्वरीय धर्म इस्लाम के बारे में अधिक जानकारियां और किताबें उन्हें देते हैं।

क्रिस्टीना के अंदर आध्यात्मिक परिवर्तन का आरंभिक बिन्दु पवित्र रमज़ान महीने की विशेष रात “शबे कद्र” था जब वह अपनी मुसलमान सहेली के साथ मस्जिद गयी थीं। क्रिस्टिना उस रात की यादों को इस प्रकार बयान करती हैं” मेरे कुछ मुसलमान दोस्तों ने मुझसे मस्जिद चलने के लिए कहा। एक मैं ही मुसलमान नहीं थी। रमज़ान का पवित्र महीना था सब लोग रोज़े से थे। उस रात वे सब मुझे अपने साथ मस्जिद ले गये। यह वह रात थी जिसे शबे क़द्र कहा जाता है। उस रात मस्जिद में धार्मिक कार्यक्रम था। उससे पहले मैं कभी भी मस्जिद नहीं गयी थी। उस रात जैसे ही मैंने मस्जिद के अंदर पहला क़दम रखा उस रात की शक्ति का आभास मैंने अपने पूरे अस्तित्व के साथ किया। क्रिस्टिना का मस्जिद जाना वह भी पवित्र रमज़ान महीने की विशेष रात को महान व सर्वसमर्थ ईश्वर की कृपा थी।

मस्जिद और पवित्र रमज़ान का महीना एक ग़ैर मुसलमान के धार्मिक आकर्षण के लिए काफ़ी है। क्रिस्टिना उस रात को मस्जिद गयी थीं जिस रात पवित्र कुरआन नाज़िल हुआ था। पवित्र कुरआन के सूरे “इन्ना अऩ्ज़लना” में महान ईश्वर कहता है” हमने इसे यानी क़ुरआन को शबे क़द्र में नाज़िल किया है तुम क्या जानो कि शबे क़द्र क्या है? क़द्र की रात हज़ार महीनों से बेहतर है। इस रात फरिश्ते और रूह अपने पालनहार के आदेश से हर चीज़ के भाग्य के लिए नाज़िल होते हैं। यह रात भोर तक सलामती, दया व कृपा है।“

इस सूरे की पहली आयत से ही ज्ञात हो जाता है कि समूचे पवित्र कुरआन को महान ईश्वर ने शबे क़द्र में पैग़म्बरे इस्लाम पर उतारा है और उसके बाद 23 वर्षों तक पैग़म्बरे इस्लाम ने इस्लाम धर्म का प्रचार- प्रसार किया जिसके दौरान महान ईश्वर ने पवित्र कुरआन की आयतों को पैग़म्बरे इस्लाम पर क्रमशः नाज़िल किया।

इस्लामी रिवायतों में शबे क़द्र को बहुत महत्वपूर्ण रात बताया गया है। स्वंय पवित्र कुरआन में महान ईश्वर ने शबे क़द्र को एक हज़ार महीनों से बेहतर बताया है और उसके बाद उसने कहा है कि तुम क्या जानो कि शबे क़द्र क्या है? शबे क़द्र के महत्व को समझने के लिए पवित्र कुरआन की यही आयत काफ़ी है। इस रात के महत्व के दृष्टिगत बहुत से मुसलमान पूरी रात जागते हैं, नमाज़ पढ़ते हैं, दुआ करते हैं और अपने पापों का प्रायश्चित करते हैं। इसकी वजह यह है कि इस रात में हर रात से अधिक दुआयें और प्रायश्चित क़बूल होते हैं।

जो लोग पवित्र रमज़ान महीने की शबे क़द्र को मस्जिद गये थे उनकी हालत को क्रिस्टिना इस प्रकार बयान करते हुए कहती हैंः "मस्जिद में अंधेरा था। कुछ लोग नमाज़ पढ़ रहे थे, कुछ दुआ कर रहे थे, बहुत से रो रहे थे मुझे नहीं पता कि क्या हो रहा है। जब मैं मस्जिद के अंदर गयी तो कई महिलाओं ने मेरा हाथ थामा और मुझे अपनी पंक्ति में बिठाया। मैं ऐसे शब्दों को सुनती थी जिन्हें दोहराया जाता था। अल्लाहो अकबर। कुछ ही क्षड़ों में मेरे भी मुंह से अचानक व सहसा अल्लाहो अकबर निकल गया और मैं भी अल्लाहो अकबर कहने व दोहराने लगी। उस रात का अध्यात्मिक प्रभाव मुझ पर पड़ा और वह इस बात का कारण बना कि मैंने इस्लाम के बारे में अध्ययन आरंभ कर दिया और अंततः मैंने लोक-परलोक में कल्याणकारी मार्ग के रूप में इस्लाम धर्म का चयन कर लिया।"

वह कहती हैं "अंत में मैं इस नतीजे पर पहुंची कि मैं स्वंय को एक मुसलमान समझती हूं और अगला कदम मेरा यह होना चाहिये कि कलमा पढ़ने के लिए मुझे मस्जिद जाना चाहिये था। क्रिस्टिना मस्जिद जाकर कलमा पढ़ लेती हैं और आधिकारिक तौर पर वह मुसलमान और बहुत बड़े मुसलमान परिवार का एक सदस्य बन जाती हैं।

अब भी उन्हें शबे क़द्र का सुन्दर व मनमोरम आध्यात्मिक समय याद है और वह इस बारे में कहती हैं मैं हमेशा लोगों से कहूंगी कि मेरे जीवन में परिवर्तन के दो बिन्दु मौजूद हैं एक शबे क़द्र और उससे जो एहसास मेरे अंदर अस्तित्व में आया और दूसरे इस्लाम के बारे में मेरा अध्ययन। उस रात मैंने अपने जीवन में अजीब आराम व शांति का आभास किया था"

वास्तव में कहा जा सकता है कि अमेरिकी युवती क्रिस्टिना उसी शबे क़द्र में ही हार्दिक रूप से मुसलमान हो गयी थीं। कुल मिलाकर वह इस्लाम और उसकी शिक्षाओं से बहुत प्रेम करती हैं। वह शबे क़द्र की आध्यात्मिक आकर्षण को नहीं भूलती हैं। इस बारे में वह कहती हैं" न केवल शबे क़द्र बल्कि पवित्र रमज़ान महीने की समस्त रातें बेहतरीन रातें हैं। मैं रमज़ान महीने की दूसरी रातों को भी वही आभास करती हूं जब मैं पहली बार मस्जिद गयी थी।"

वह पवित्र रमज़ान महीने की उस विशेषता की ओर संकेत करती हैं जिस पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है। वह कहती हैंः " मेरे विचार में पवित्र रमज़ान महीने में जो विशेष चीज़ है वह इस महीने के विशेष नियम में निहित है। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं इतना अनुशासित व नियमबद्ध हो जाऊंगी। मेरे विचार में इस प्रकार का अनुशासन व नियम सबके लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा।"

खुशी की बात यह है कि क्रिस्टीना उन लोगों में से हैं जिनके परिजनों ने इस्लाम धर्म स्वीकार करने पर उनका कोई विशेष विरोध नहीं किया। क्रिस्टिना इस बारे में कहती हैं" जब मेरे मां- बाप ने देखा कि मैं बहुत खुश रहती हूं इतना खुश तो मैं उस वक्त भी नहीं थी जब स्कूल में थी तो उन लोगों ने सोचा कि मेरी बेटी को कोई चीज़ मिल गयी है जिसने उसे इस हद तक प्रसन्न कर दिया है। इस बात के दृष्टिगत उन लोगों ने भी मेरा विरोध नहीं किया।

इस्लाम धर्म स्वीकार करने के बाद यह अमेरिकी युवती विभिन्न फायदों के कारण अपने लिए हिजाब का चयन करती है। अलबत्ता उनका परिवार हिजाब को कोई विशेष पसंद नहीं करता था परंतु धीरे- धीरे उसे भी स्वीकार कर लिया और अब उस पर मेरा परिवार कोई आपत्ति नहीं जताता। क्रिस्टिना कहती हैं मेरी मां के साथ मेरा संबंध बहुत घनिष्ठ व मधुर हो गया है। वह ख़ुद मेरे लिए हिजाब व इस्लामी आवरण खरीदती है। इसके लिए मैं ख़ुदा का शुक्र अदा करती हूं।"

जिस तरह से ईश्वरीय धर्म स्वीकार करने वाले शांति, सुरक्षा और आराम का आभास करते हैं और चाहते हैं कि दूसरे भी शांति व सुकून का आभास करें उसी तरह क्रिस्टिना भी चाहती हैं कि दूसरे भी शांति व सुरक्षा का आभास करें। वह कहती हैंः "मैं ऐसे लोगों को जानती हूं जो ईश्वर और प्रलय को नहीं मानते हैं, मैं इस बात को बहुत पसंद करती हूं कि ऐसे लोगों को शांति-सुरक्षा और लोक-परलोक के कल्याण का रास्ता बताऊं जो मुझे मिला है।

आज के भौतिक संसार में आपाधापी का माहौल है। हर इंसान शांति चाहता है। जिन लोगों के पास आराम की हर चीज़ भी मौजूद है पर उनके पास आत्मिक शांति नहीं है। दुनिया की चकाचौंध से परेशान लोग दिन-प्रतिदिन ईश्वरीय धर्म इस्लाम को स्वीकार कर रहे हैं। क्योंकि इस्लाम धर्म न केवल लोक-परलोक में सफल जीवन के रास्तों को दिखाता है, बल्कि इंसान को वास्तविक व आध्यात्मिक शांति भी प्रदान करता है। महान व सर्वसमर्थ ईश्वर से दुआ है कि हम सबको लोक-परलोक में सफल जीवन बिताने का सामर्थ्य प्रदान करने के साथ वास्तविक शांति प्रदान करे।

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