क्या है नान घोटाला
नागरिक आपूर्ति निगम राज्य भर में लाखों परिवारों को राशन बांटने का काम करती रही है. राज्य की आर्थिक अपराध शाखा यानी ईओडब्ल्यू और भ्रष्टाचार निवारक ब्यूरो ने 12 फ़रवरी 2015 को नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के 28 ठिकानों पर एक साथ छापा मार कर करोड़ों रुपये बरामद किये थे.
इसके अलावा इस मामले में कथित भ्रष्टाचार से संबंधित कई दस्तावेज़, हार्ड डिस्क और डायरी भी एंटी करप्शन ब्यूरो ने ज़ब्त की थी. आर्थिक अपराध शाखा ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में राइस मिलों से लाखों क्विंटल घटिया चावल लिया गया और इसके बदले करोड़ों रुपये की रिश्वतख़ोरी की गई. इसी तरह नागरिक आपूर्ति निगम के ट्रांसपोर्टेशन में भी भारी घोटाला किया गया. नमक की आपूर्ति में भी कथित भ्रष्टाचार किया गया.
इस मामले में आरंभिक तौर पर 27 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया था. बाद में दो आईएएस अधिकारी, आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज किया गया. कथित घोटाले के दौरान दोनों अधिकारी क्रमश: नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध निदेशक और चेयरमैन थे.
तब राज्य में विपक्षी दल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने आरोप लगाया था कि इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा ने अभियुक्तों से एक डायरी भी बरामद की थी, जिसमें 'सीएम मैडम' समेत तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के कई परिजनों के नाम कथित रुप से रिश्वत पाने वालों के तौर पर दर्ज थे.
उन्होंने कहा था कि इस कथित डायरी के 107 पन्नों में विस्तार से सारा कथित लेन-देन दर्ज था, लेकिन एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा ने इस डायरी के केवल छह पन्नों का सुविधानुसार उपयोग किया.
एंटी करप्शन ब्यूरो के तत्कालीन मुखिया मुकेश गुप्ता ने भी मीडिया में दिए गये अपने बयानों में माना था कि घोटाले के तार जहां तक पहुँचे हैं, वहां जाँच कर पाना उनके लिये संभव नहीं है.
इस मामले की जाँच चलती रही, कई अधिकारी सालों जेल में रहे. लेकिन रमन सिंह की सरकार ने हाईकोर्ट में एक हलफ़नामा दे कर दावा किया कि नागरिक आपूर्ति निगम में कोई घोटाला हुआ ही नहीं.
हालांकि निचली अदालत में तो यह मामला चलता ही रहा. इस घोटाले को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में हमर संगवारी ने 42/2015, सुदीप श्रीवास्तव ने 43/2015, वीरेंद्र पांडेय ने 44/2015 और वशिष्ठ नारायण मिश्रा ने 57/2015 जनहित याचिका भी दायर की. मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुँचा और अदालत ने इसकी समयबद्ध सुनवाई के निर्देश भी दिए, लेकिन मामला अपनी रफ़्तार से चलता रहा.
इस दौरान ही कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के बतौर भूपेश बघेल ने दोनों आईएएस अधिकारियों अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला के ख़िलाफ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक को पत्र लिखा.
यह भी दिलचस्प है कि कथित घोटाले के अभियुक्त दोनों आईएएस अधिकारियों अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला के ख़िलाफ़ 17 जुलाई 2015 को राज्य शासन द्वारा और चार जुलाई 2016 को केंद्र सरकार द्वारा अभियोजन स्वीकृति दी गई, लेकिन सालों तक दोनों के ख़िलाफ़ अभियोग पत्र पेश नहीं किया गया.
ऐन विधानसभा चुनाव के बाद लेकिन चुनाव परिणाम से पहले, 29 नवंबर 2018 को दोनों अभियुक्तों के ख़िलाफ़ अभियोग पत्र पेश किया गया.
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