आतंकी संगठन दाइश से अमरीका और नैटो के सहयोग के ठोस दस्तावेज़ों का मुद्दा,


रूसी विदेश मंत्रालय का कहना है कि उसके पास उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान में दाइश और अमरीका के सहयोग के ठोस दस्तावेज़ मौजूद हैं।.


....रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ज़ाख़ारोवा का कहना है कि हम कई बार दाइश के साथ अमरीका और नैटो के सहयोग के डोज़ियर पेश कर चुके हैं और यह दूसरों की ओर से सुरक्षा परिषद में पेश किए जाने वाले झूठे साक्ष्यों की तरह नहीं हैं।.....रूसी अधिकारी इससे पहले भी उत्तरी अफ़गानिस्तान में अमरीकियों के ज़रिए दाइशी आतंकियों के एक स्थान से दूसरी जगह स्थानान्तरण और अमरीकी हेलीकाप्टरों की संदिग्ध उड़ानों की बात कह चुके हैं।....यह कम से कम पांच साल पहले की बात है।....अफ़ग़ानिस्तान के वरिष्ठ टीकाकार उस समय यह मुद्दा उठा चुके हैं लेकिन बाद में काबुल में उनकी हत्या कर दी गई और हत्यारों का कुछ पता नहीं चला। ...अफ़ग़ान टीकाकार ने कहा था कि तालेबान के नियंत्रण वाले इलाक़ों में अमरीकी हेलीकाप्टरों के उतरने के मामले में यह तय है कि अमरीकियों को पूरी तरह इस मामले की जानकारी है। अमरीकियों को इस बारे में जवाब देना चाहिए अलबत्ता वह जवाब देने के लिए तैयार नहीं हैं।...उत्तरी अफ़गानिस्तान में दाइश की मदद करके अमरीकी क्या हासिल करना चाहते हैं। ...बल्ख़ के इलाक़े से अफ़ग़ान सांसद का कहना है कि दाइश से सहयोग के पीछे अमरीका का उद्देश्य सेंट्रल एशिया में अशांति फैलाना है।....


अफ़ग़ानिस्तान में चरमपंथियों को बढ़ावा देने का विषय काफ़ी पुराना है। अमरीका ने शीत युद्ध के काल में ही पूर्व सोवियत संघ के आसपास के इलाक़ों में इसी तरह के संगठनों को मज़बूत करने की कोशिश की है।.....हामिद करज़ई ने कहा कि उन्होंने ब्रेजेन्सकी से पूछा था कि क्या यह सही है कि सोवियत संघ को कमज़ोर करने के लिए आपने इन चरमपंथी संगठनों को बनाया था। ब्रेजेन्सकी ने जवाब दिया कि हां, करज़ई ने उनसे पूछा कि आपने किस क़ीमत पर यह काम किया। आज हम जो दर्द झेल रही हैं वह इसी पालीसी का नतीजा है। शीत युद्ध के लक्ष्यों के तहत हमारे ऊपर चरमपंथ थोप दिया गया। काबुल के स्कूल में हमारी बच्चियों का नरसंहार इसी नीति का नतीजा है। दाइश इसी नीति का नतीजा है।....इस देश में दाइश का वजूद बड़े पैमाने पर अमरीकी सैनिकों की तैनाती की छाया में पनपा जो आतंकवाद से लड़ाई के नाम पर अफ़ग़ानिस्तान में तैनात हुए थे।.....अफ़ग़ान युवा का कहना है कि अमरीकियों ने आतंकवादियों के ख़िलाफ़ कुछ नहीं किया बल्कि उन्हें बढ़ावा दिया और इसी के नतीजे में आए दिन धमाके हो रहे हैं और हमारे हमवतन मारे जा रहे हैं।....तालेबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद कहते हैं कि दाइश से सहयोग के बारे में अमरीका इंकार करता है लेकिन हमने ख़ुद देखा था कि अमरीका सहयोग कर रहा था।

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