बीते दौर की महिला निर्माता और कहानियां


इस विषय पर अमृत गंगर टिप्पणी करते हैं, " जब कोई महिला किसी विषय पर फ़िल्म बनाती है, लिखती है, निर्देशन करती है या निर्माण करती है तो उसमें उस महिला का दृष्टिकोण आ ही जाता है, पर व्यक्तिगत तौर पर मुझे लगता है कि 1930 और 1940 के दशक के मुकाबले आज का दौर काफ़ी अलग है. आज का बॉलीवुड उस दौर के हिंदी फ़िल्म स्टूडियो के मुकाबले बेहद सामंती और लिंग भेद वाला नज़र आता है, साथ ही सांप्रदायिक मानसिकता भी है. वरना उस दौर में फ़ातिमा बेगम, ज़ुबैदा और जद्दनबाई जैसी महिलाएँ उभर कर नहीं आतीं.''

वो आगे कहते हैं," उन अभिनेत्रियों ने हर विषय में अपना हाथ आज़माया जिसमें सामाजिक, ऐतिहासिक, साहसी, बाग़ी, करतब दिखानेवाली और थ्रिलर फ़िल्में शामिल थीं. अगर ऐसा नहीं होता तो उस दौर की निडर नाडिया नहीं बनती."

उस समय बनी 'बलिदान' फ़िल्म में माँ काली की जीव हत्या की निंदा की गई थी जिसमें ज़ुबैदा ने अभिनय किया था.

1960 के बाद आया बदलाव

हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर में कई अभिनेत्रियां निर्माता बन अनेक विषयों पर अपनी राय रखती रहीं. पर वक़्त के साथ उनकी संख्या में गिरावट आई. इतिहासकार अमृत गंगर इसमें समाज में बढ़ती पितृसत्तात्मकता को कारण बताते हैं.

''1960 के बाद समाज में पितृसत्तात्मकता और रूढ़िवादिता बढ़ी और साथ ही धार्मिक, सामाजिक और पारिवारिक परम्पराओं को तोड़ने का डर भी बढ़ा.''

वो आगे कहते है," व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि फ़िल्म उद्योग में महिलाओं की बहुमुखी प्रतिभाओं के उभरने के लिए उदार, धर्मनिरपेक्ष, ग़ैर-अराजकतावादी, गैर-नस्लवादी और गैर-भाषावादी दृष्टिकोण वाले माहौल का होना बहुत ज़रूरी है. कल्पना कीजिए, फ़ातिमा बेगम गुजरात में सूरत के पास के राजघराने की थीं जिन्होंने नवाब से शादी की थी. उनकी तीन अभिनेत्री बेटियाँ राजकुमारियां थीं. उनके पुरुष लोग कम अराजक और प्रभावशाली रहे होंगे, हम यह अनुमान लगा सकते हैं."

इक्कीसवीं सदी के हिंदी सिनेमा की अभिनेत्रियां बदलते वक़्त के साथ कई ऐसे विषयों वाली फ़िल्मों का हिस्सा बनी हैं जिसने समाज में एक संवाद छेड़ा है और दर्शकों को सिनेमाघर तक खींचकर कमाई भी की है.

इतिहासकार एस एम एम औसजा मानते हैं कि टॉप अभिनेत्रियाँ जो बॉक्स ऑफ़िस का भार अपने कंधों पर ले रही हैं, उन अभिनेत्रियों की फ़िल्म निर्माण में सक्रियता से दर्शकों को कई अनोखी नई कहानियां देखने को मिलेंगी.


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