ममता ख़ुद घर-घर घूम रही हैं
ममता बनर्जी लगातार इलाके में नुक्कड़ सभाएं करती रही हैं और घर-घर जाकर प्रचार करती रही हैं. चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने मस्जिदों और गुरुद्वारों के अलावा मंदिरों का भी दौरा किया है.
उसके बाद बीजेपी को ममता के ख़िलाफ़ मुद्दा मिल गया है. बीजेपी की चुनाव समिति के सदस्य शिशिर बाजोरिया कहते हैं, "ममता बनर्जी को अब इस बात का एहसास हो गया है कि भबानीपुर सीट पर जीत की राह आसान नहीं है. यही वजह है कि उन्हें पहले दिन से ही पसीना बहाना पड़ रहा है."
बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह सवाल करते हैं, "क्या आपने पहले किसी मुख्यमंत्री को उपचुनाव में जीत के लिए इतनी मेहनत करते देखा है?"
बीजेपी ने चुनाव प्रचार के आख़िरी दिन सोमवार को इलाके में पूरी ताक़त झोंक दी. उसके कई नेताओं ने अलग-अलग वॉर्डों में घर-घर जाकर वोटरों से मुलाक़ात की और बीजेपी का समर्थन करने की अपील की.
लेकिन टीएमसी नेता सौगत राय दलील देते हैं, "किसी भी उपचुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी का पलड़ा हमेशा भारी रहता है. लोग उसी का समर्थन करते हैं. जहां तक ममता के प्रचार की बात है वो हर चुनाव को युद्ध के तौर पर लेती हैं. उनके लिए ये आम लोगों से जुड़ने और संगठन को मजबूत करने का मौक़ा होता है."
चुनाव बाद हुई हिंसा को भाजपा ने बनाया मुद्दा
ममता अपने चुनाव अभियान के दौरान केंद्र सरकार और बीजेपी के केंद्रीय नेताओं के प्रति हमलावर रही हैं. दूसरी ओर, बीजेपी ने अपने अभियान के दौरान टीएमसी के कथित भ्रष्टाचार और चुनाव बाद हुई हिंसा को ही मुद्दा बनाया है.
बीजेपी उम्मीदवार और कलकत्ता हाईकोर्ट की एडवोकेट प्रियंका टिबरेवाल कहती हैं, "ये धारणा ग़लत है कि हम सिर्फ़ गैर-बंगाली वोटरों पर ही ध्यान दे रहे हैं. हम सब के पास पहुंच रहे हैं."
कभी ममता बनर्जी के सबसे क़रीबी और अब सबसे कट्टर प्रतिद्वंद्वी बने शुभेंदु अधिकारी एक नुक्कड़ सभा में चुनाव अभियान के दौरान ममता की मेहनत का ज़िक़्र करते हुए कहते हैं, "बिल्ली बहुत मजबूर होने पर ही पेड़ पर चढ़ती है."
लेकिन ममता के भतीजे सांसद अभिषेक बनर्जी कहते हैं, "हम कम से कम एक लाख वोटों के अंतर से जीत सुनिश्चित करना चाहते हैं.
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