सीरिया की बिगड़ती आर्थिक स्थिति के मुख्य कारण हैं क्या ?
सीरिया की बिगड़ती स्थिति में ज़ायोनी शासन, अमरीका, उसके घटक तथा इनका समर्थन प्राप्त आतंकवादी गुटों की भूमिका रही है। सीरिया की बिगड़ती आर्थिक स्थिति के बारे में संयुक्त राष्ट्रसंघ ने चेतावनी दी है।
सन 2011 से सीरिया, गंभीर आंतरिक संकट का सामना करता आ रहा है।
दूसरे अरब देशों की तुलना में सीरिया की स्थिति थोड़ी भिन्न है क्योंकि वहां पर उत्पन्न होने वाला आंतरिक संकट, विदेशी हस्तक्षेप के कारण ही अस्तित्व में आया है। वर्चस्ववादी शक्तियों ने आतंकी गुटों का हर प्रकार से समर्थन करते हुए उनको सीरिया में सक्रिय किया ताकि इस अरब देश के बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया जाए।
सीरिया के मूलभूत ढांचे और समाजी ढांचे के बिखरने से वहां पर कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो गईं जैसे बेरोज़गारी और आर्थिक संकट आदि। इसी वजह से एक करोड़ बीस लाख से अधिक सीरिया वासियों को सीरिया के भीतर या बाहर पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा।इन सभी बातों को कारण सीरिया में एसा आंतरिक संकट उभरा जिसे इस समय स्पष्ट रूप में देखा जा सकता है।
बताए जाने वाले इन कारकों के साथ ही पश्चिमी प्रतिबंधों से सीरिया की आर्थिक स्थिति को और भी अधिक नुक़सान पहुंचा। अब एक दशक से अधिक के युद्ध और प्रतिबंधों के कारण सीरिया की अर्थव्यवस्था बहुत ही दयनीय स्थिति में पहुंच गई है।
इसके अलावा उत्तरी सीरिया में तुर्की और अमरीका के क्रियाकलाप, समस्याओं में बढ़ोत्तरी का कारण बने हुए हैं। अमरीका और तुर्की ने आतंकी गुटों का समर्थन करते हुए उनके लिए उत्तरी सीरिया से ऊर्जा के स्रोतो की लूट का मार्ग प्रशस्त कर दिया है जिसकी वजह से सीरिया की आय बहुत बुरी तरह से प्रभावित हुई है।
सीरिया के वर्तमान संकट के बारे में हमने जितने कारकों का उल्लेख किया उनके अतिरिक्त एक अन्य कारक ने भी सीरिया की अर्थव्यवस्था को क्षति ग्रस्त किया और वह है कोरोना। कोरोना के कारण वैसे तो विश्व के अन्य देशों को भी आर्थिक क्षति पहुंची है किंतु सीरिया का मामला इसलिए अलग है कि वह कोरोना से पहले से ही समस्याओं में घिरा हुआ था।
यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्रसंघ ने बताया है कि खाद्ध पदार्थों की दृष्टि से सीरिया में 60 प्रतिशत से अधिक लोग बहुत बुरी हालत में जीवन गुज़ार रहे हैं। संयुक्त राष्ट्रसंघ के मानवाधिकार मामलों के प्रभारी मार्टिन ग्रीफ़्त्स के अनुसार सीरिया में 90 प्रतिशत से अधिक लोग इस समय निर्धन रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। इसीलिए उन्होंने विश्व समुदाय से लाखों सीरिया वासियों की तत्काल सहायता की मांग की है।
यह एक कटु वास्तविकता है कि अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय का सदस्य होने के बावजूद पिछले एक दशक के दौरान सीरिया की आर्थिक स्थिति में सुधार के उद्देश्य से अन्तर्राष्ट्रीय सगठनों की ओर से अबतक कोई भी प्रभावी क़दम नहीं उठाया गया है। एसे में यह कहा जा सकता है कि सीरिया की वर्तमान विषम स्थिति और वहां पर दिन-प्रतिदिन गंभीरत होती मानवीय त्रासदी की ज़िम्मेदारी, संयुक्त राष्ट्रसंघ और अन्य अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों पर आती है।
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