निमोनिया के लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार के बारे में जानें
निमोनिया के लक्षण और किचन में मौजूद चीजों और आयुर्वेदिक उपचार के बारे में जानकारी के लिए इस आर्टिकल को जरूर पढ़ें।
निमोनिया एक संक्रामक रोग है, जो छिकने या खांसने से फैलता है। निमोनिया में फेफड़े की छोटी-छोटी थैलिओं में (एल्वियोली) में द्रव्य और मवाज भर जाता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है और धीरे-धीरे शरीर में ऑक्सीजन का लेवल कम होने लगता है। यह 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों, बुजुर्गों, किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक है। सर्दियों के दिनों में छोटे बच्चों में निमोनिया होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है। इसके बारे में विस्तार से हमें वेदास क्योर के फाउंडर और डायरेक्टर श्री विकास चावला जी बता रहे हैं।
बच्चों में निमोनिया के प्रमुख कारण
निमोनिया छोटे बच्चों के लिए काफी घातक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया में 5 वर्ष से कम उम्र के 15 प्रतिशत बच्चों की मौत का एक प्रमुख कारण निमोनिया है। यह वायरस, बैक्टीरिया और कवक सहित कई संक्रामक कारकों से बच्चों में तेजी से फैलता है। निमोनिया के सबसे आम कारणों में स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया, हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी (एचआईबी), रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस और एचआईवी से संक्रमित शिशुओं में न्यूमोसिस्टिस जीरोवेसी है। इसके और भी कारक है जैसे घर के अंदर ईंधन के रूप में लकड़ी या गोबर का उपयोग और पेरेंटल स्मोकिंग के संपर्क में आना।
शिशुओं में निमोनिया के लक्षण
- खांसी के साथ सांस लेने में कठिनाई या सीने में निचले हिस्से में खिंचाव।
- बुखार का कपकपी के साथ आना।
- बेहोशी, हाइपोथर्मिया और शरीर में अकड़न महसूस होना।
- बलगम के साथ, कमजोरी और भूख न लगना या बलगम के साथ ब्लड आना।
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