ख़त्म होती जा रही है अमरीकियों में औलाद की चाहतः रिपोर्ट
अमेरिका में ऐसे लोगों की संख्या बहुत तेज़ी से बढ़ती जा रही है जो बिना संतान के ही ज़िंदगी गुज़ारना पसंद करते हैं, वे संतान नहीं चाहते।
अमेरिका में ऐसे लोगों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है, जो बिना संतान के जीना चाहते हैं।
संचार माध्यमों के अनुसार हाल में जारी एक सर्वे रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि 19 से 49 वर्ष के वे अमरीकी जो अभी माता-पिता नहीं बने हैं, उनमें से 44 फीसदी ने कहा कि अब उनके माता-पिता बनने की संभावना नहीं है क्याोंकि वे संतान नहीं चाहते। 2018 के एक ऐसे ही सर्वे में ऐसी राय सिर्फ 37 फीसदी लोगों ने जताई थी।
पिउ रिसर्च एजेंसी की ओर से कराए गए सर्वे से यह बात सामने आई है कि अमेरिका में हर उम्र वर्ग के लोगों में बिना संतान के जीने की प्रवृत्ति अब बढ़ रही है अमरीकियों की यही सोच, इस देश के भीतर प्रजनन दर में गिरावट की प्रमुख वजह बताई जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार लोगों में बढ़ रहे इस रुझान का अमेरिका की आबादी पर गहरा असर पड़ेगा। अमरीका में पहले ही रिकॉर्ड सीमा तक प्रजनन दर गिर चुकी है। अमेरिका जनसंख्या ब्यूरो के इस साल के जारी आंकड़ों से यह सामने आया है कि अब अमेरिका में अधिक लोग निःसन्तान रहते हुए रिटायर हो रहे हैं।
एक दिलचस्प आंकड़ा यह भी सामने आया कि अमरीका के कैलिफॉर्निया राज्य के शहर सैन फ्रांसिस्को में अब कुल आबादी में बच्चों की संख्या मात्र 13 प्रतिशत रह गई है। सन 2010 में यही संख्या 13.4 प्रतिशत थी। सैन फ्रांसिस्को में आज बच्चों से ज्यादा संख्या पालतू कुत्तों की है।
इससे पहले तक अमेरिका में यह ट्रेंड था कि धार्मिक प्रवृत्ति के लोग सेकुलर रुझान वालों की तुलना में अधिक संतान पैदा किया करते थे। ऐसे लोग जल्दी शादी भी कर लेते थे। लेकिन हाल में यह अंतर भी घटा है। बताया यह जा रहा है कि कोरोना महामारी के दौरान धार्मिक प्रवृत्ति वाले अमेरिकियों में भी संतान की योजना टालने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
याद रहे कि यह विस्तृत रिपोर्ट अमेरिका में थैंक्सगिविंग दिवस के मौके पर जारी की गई थी जिसमें लोग अपने परिजनों से मिलते हैं और जीवन में उनके सहयोग के लिए धन्यवाद देते हैं। अमरीका में थैंक्सगिविंग दिवस 25 नवंबर को मनाया जाता है।
अमरीकी विशेषज्ञों के अनुसार संतान को लेकर देश में जो ट्रेंड सामने आया है, उसका मतलब यह है कि भविष्य में थैंक्सगिविंग डे, वैसा बड़ा उत्सव नहीं रह जाएगा, जैसा कि वह पहले हुआ करता था।
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