ज़ायोनी रक्षा मंत्री से उनके निजी आवास में महमूद अब्बास की मुलाक़ात का क्या मतलब है?
इस्राईली अख़बार यरूशलेम पोस्ट ने मंगलवार को ज़ायोनी रक्षा मंत्री बेनी गैंट्ज़ से फ़िलिस्तीनी अथॉरिटी के मुखिया महमूद अब्बास की मुलाक़ात की ख़बर दी है। यह मुलाक़ात रोश हाईन शहर में स्थित गैंट्ज़ के निजी आवास पर हुई, जिसमें सुरक्षा और अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया।
इस्राईल में नफ़्ताली बेनेत के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद से अब्बास की गैंट्ज़ के साथ यह दूसरी मुलाक़ात है। दोनों के बीच पहली मुलाक़ात, अगस्त में रामल्लाह में हुई थी, जो पिछले एक दशक के दौरान इस स्तर पर पहली मुलाक़ात थी।
इस मुलाक़ात पर हमास की प्रक्रिया एक ध्यान योग्य बिंदू है। हमास ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए अब्बास के इस क़दम को फ़िलिस्तीनी आंदोलन की पीठ में छुरा घोंपना बताया है। दूसरा बिंदू यह है कि यह मुलाक़ात ऐसे समय में हुई है कि जब इस्राईल ने फ़िलिस्तीनियों के लिए सबसे कठिन परिस्थितियां उत्पन्न कर रखी हैं, चाहे वह ग़ज्ज़ा पट्टी में रहने वाले फ़िलिस्तीनी हों या अवैध अधिकृत इलाक़ों में रहने वाले फ़िलिस्तीनी। इसलिए इस मुलाक़ात को फ़िलिस्तीनियों के ज़ख़्मों पर नमक छिड़कना माना जाएगा और इससे उन्हें एकजुट करने में कोई मदद नहीं मिलेगी। तीसरा बिंदू यह है कि फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण के सुरक्षा बल, वास्तव में इस्राईली रक्षा मंत्री से से आदेश लेते हैं, क्योंकि इस मुलाक़ात में वेस्ट बैंक में फ़िलिस्तीनी सुरक्षा बलों और ज़ायोनी सैनिकों के बीच अधिक सहयोग का मुद्दा उठाया गया है। इससे फ़िलिस्तीनियों पर अधिक दबाव बनाया जा सकेगा और उनकी आवाज़ को चालाकी से कुचला जा सकेगा।
इस मुलाक़ात के बारे में चौथा बिंदू यह है कि हालिया घटनाक्रमों में ग़ज्ज़ा स्थित प्रतिरोधी गुटों और वेस्ट बैंक के फ़िलिस्तीनियों के बीच एक ख़ास एकता और एकजुटता देखी गई है। ग़ज्ज़ा स्थित फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधी गुटों और इस्राईल के बीच हालिया लड़ाई में वेस्ट बैंक यहां तक कि 1967 से पहले क़ब्ज़ा किए गए इलाक़ों में रहने वाले फ़िलिस्तीनियों ने खुलकर हमास को अपना मसीहा बताया और ग़ज्ज़ा के हक़ में सड़कों पर निकलकर प्रदर्शन किए। क्योंकि यह लड़ाई मस्जिदुल अक़सा पर ज़ायोनियों की चढ़ाई के ख़िलाफ़ और बैतुल मुक़द्दस के फ़िलिस्तीनियों के हक़ में शुरू हुई थी। इसने तेल-अवीव की चिंताओं को बढ़ा दिया, यही वजह है कि इस्राईली अधिकारियों ने फ़िलिस्तीनियों में फूट डाले रखने और उन्हें एकजुट नहीं होने देने के लिए अपने प्रयास तेज़ कर दिए हैं।
लेकिन महमूद अब्बास और इस्राईली अधिकारी शायद यह भूल रहे हैं कि इस तरह की मुलाक़ातों से फ़िलिस्तीनी पहले से अधिक एकजुट होंगे, क्योंकि उन्हें अपने बीच ग़द्दारों को पहचानने में आसानी होगी, जिसके परिणाम स्वरूप उनके आंदोलन की धार और तेज़ होगी और अंततः फ़िलिस्तीनी सरज़मीन आज़ाद होगी।
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