एक वैज्ञानिक और टीवी स्टार ने कैसे बदल दी बांग्लादेश की तस्वीर



टंगाइल के एक गाँव में एक नए टीन के शेड वाले घर के सामने शहर से आए लोगों का एक समूह खड़ा है. फ़सल के खेत का दौरा करने के बाद वह थक गया है और थोड़ा आराम कर रहा है. धान की स्थानीय किस्म चामरा के स्थान पर अधिक उपज देने वाले धान की खेती शुरू होने के बाद क्षेत्र की स्थिति क्या है, यह देखने गये थे ये लोग.

कई शहरी लोगों को देख कर घर का एक आदमी निकल कर बाहर आ गया. जानना चाहा कि ये लोग कौन हैं.

"हम बांग्लादेश चावल अनुसंधान संस्थान (राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट) के लोग हैं," उन्होंने कहा.

बांग्लादेश राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट के पूर्व वैज्ञानिक डॉक्टर एमए सलाम ने कहा, "इसके बाद जो कुछ हुआ, उसके लिए हम बिल्कुल भी तैयार नहीं थे."

"वह आदमी ख़ुशी से चिल्लाया और मुझे गले लगा लिया. उसने कहा, ''अल्लाह ने आपको फ़रिश्ता बनाकर हमारे पास भेजा है. हम चौंक गए. क्या हुआ, कुछ समझ नहीं पा रहे थे."

घटना 1996 की है. जमुना पुल के निर्माण के लिए जिस नदी को नियंत्रित किया गया था, उसके कारण यह क्षेत्र तब बाढ़ मुक्त हो गया था. पहले वहां चामरा धान की स्थानीय क़िस्में ही उगाई जाती थीं, जो बाढ़ के पानी में उगती हैं और तीन से चार फ़ुट पानी में उगाई जा सकती हैं. लेकिन उपज बहुत कम होती थी. इलाके के बाढ़ से मुक्त होने के बाद किसानों ने पहली बार अधिक उपज देने वाली धान की क़िस्मों की खेती शुरू की.

इसके बाद वह किसान डॉक्टर सलाम और उनके साथियों का हाथ पकड़कर घर के अंदर ले गया. उसने कहा, "यह जो टीन की छत वाला घर आप देख पा रहे हैं, इसे मैंने धान की बिक्री से मिले पैसों से बनाया है. मेरी सात पुश्तें अब तक झोपड़ियों में ही रहती आई हैं. चामरा धान की खेती के समय हमारे पास कभी खाने को होता था, तो कभी नहीं होता था. अब देखिये, मेरे पास कितना धान है. आप लोगों ने हमलोगों की ज़िंदगी बदल दी."

एक सफल चावल वैज्ञानिक के रूप में अपने कई दशक के लंबे कार्यकाल में डॉक्टर सलाम की सबसे मधुर यादों में से यह एक है.

"आउस, आमन और बोरो - इन तीनों मौसमों को मिलाकर अब हमारे देश में कुल 11 से साढ़े ग्यारह मिलियन हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है. अब हमें प्रति हेक्टेयर औसतन चार टन उपज मिलती है. परिणामस्वरूप, हम अब अतिरिक्त धान का उत्पादन कर पा रहे हैं. यह न होने पर हम प्रति हेक्टेयर डेढ से दो टन धान का ही उत्पादन कर पाते जिससे बांग्लादेश के 17 करोड़ लोगों का पेट भरना असंभव था," उन्होंने कहा था.


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सऊदी अरब में महिला रोजगार की बढ़ती दर, कारण एवं चुनौतियां

'एक मिनट नहीं रुकी बमबारी', यूक्रेन पर रूसी हमले के 11वें दिन क्या-क्या हुआ

टेलीग्राम: जहां महिलाओं के न्यूड खुलेआम शेयर किए जाते हैं