भारत की संसद में नया बजट पेश, ख़ास ख़ास बातों पर एक नज़र
भारत की मोदी सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्तीय वर्ष 2022-23 का आम बजट पेश किया।
सोमवार को आर्थिक सर्वेक्षण जारी किया गया, जिसमें इस साल जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 9.2% रखा गया है।
भारतीय वित्त मंत्री का कहना था कि उनकी सरकार समावेशी विकास के पथ पर आगे बढ़ रही है,वित्त मंत्री ने कहा कि इस साल भारत की अर्थव्यवस्था में वृद्धि दर का अनुमान 9 फ़ीसदी से भी ऊपर है और यह दुनिया की सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से ज़्यादा है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 तक राजस्व घाटा जीडीपी के 4.5% तक पहुँचने की बात कही गई है। 2022/23 में राजस्व घाटा जीडीपी का 6.4% रहने का अनुमान है।
अगर इंफ़्रास्ट्रक्चर की बात की जाए तो पीएम गति शक्ति में एक्सप्रेसवे के लिए मास्टरप्लान है। इसके तहत 2022-23 में 25, 000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग का विस्तार किया जाएगा। हाईवे विस्तार पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे।
पहाड़ी क्षेत्रों में पारंपरिक सड़कों के लिए राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम को पीपीपी मोड में लिया जाएगा, इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। डिज़िटल यूनिवर्सिटी भी बनाई जाएगी जहां अलग-अलग भारतीय भाषाओं में पढ़ाई होगी।
व्यवसाय करने में सुविधा के लिए देश में कहीं भी पंजीकरण के लिए 'एक राष्ट्र, एक पंजीकरण' स्थापित किया जाएगा।
रेलवे छोटे किसानों और उद्यमों के लिए कुशल लॉजिस्टिक्स विकसित करेगा, स्थानीय उत्पाद की आपूर्ति श्रृंखला में मदद के लिए 'एक स्टेशन, एक उत्पाद लागू होगा।
समावेशी विकास सरकार की प्राथमिकता है, जिसमें धान, खरीफ और रबी फसलों के किसान शामिल हैं, इसके तहत 1,000 एलएमटी धान की ख़रीद की उम्मीद है, इससे एक करोड़ से अधिक किसान लाभान्वित होंगे।
डिज़िटल बैंकिंग को हर नागरिक तक पहुँचाने के उद्देश्य से देश के 75 ज़िलों में 75 डिज़िटल बैंकिंग इकाइयां शुरू होंगी।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 60,000 घरों की पीएम आवास योजना के लाभार्थियों के रूप में पहचान की जाएगी। 2022-23 में पीएम आवास योजना के लाभार्थियों के लिए 80 लाख मकानों का निर्माण पूरा किया जाएगा।
2030 तक सौर क्षमता के 280 गीगावाट के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 19,500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त आवंटन किया जाएगा।
कोविड महामारी के कारण औपचारिक शिक्षा से दूर होने वाले बच्चों के लिए वन-क्लास-वन-टीवी चैनल व्यवस्था लाई जाएगी।
किसानों के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए, राज्य सरकारों और एमएसएमई की भागीदारी के लिए व्यापक पैकेज पेश किया जाएगा।
गंगा के किनारे 5 किमी चौड़े गलियारों में किसानों की ज़मीन पर फोकस के साथ पूरे देश में रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
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