बजट में क्या-क्या शामिल होता है?




सरकार का आम बजट मूल रूप से उसके खर्चे और राजस्व (रेवेन्यू) का ब्योरा होता है. सरकार के खर्च में जनकल्याण योजनाओं में दिया जाने वाला फंड, आयात के खर्चे, सेना की फंडिंग, वेतन और कर्ज पर दिया जाने वाला ब्याज वगैरह शामिल होता है.

जबकि सरकार टैक्स लगाने के साथ ही, सार्वजनिक क्षेत्र के कारोबारों से कमाई और बॉन्ड जारी कर राजस्व इकट्ठा करती है.

इस बजट के दो हिस्से होते हैं- रेवेन्यू बजट और कैपिटल बजट. रेवेन्यू बजट में ही खर्च और राजस्व का ब्योरा होता है. रेवेन्यू प्राप्ति में टैक्स और गैर टैक्स स्रोत से हासिल रकम दिखाई जाती है.

रेवेन्यू खर्च सरकार के हर दिन के कामकाज और नागरिकों को दी जाने वाली सेवाओं में लगा खर्च होता है. अगर रेवेन्यू खर्च रेवेन्यू प्राप्ति से ज्यादा होता है तो सरकार को राजस्व का घाटा होता है.

कैपिटल बजट या पूंजी बजट सरकार की प्राप्तियों और उसकी ओर से किए गए भुगतान का ब्योरा होता है. इसमें जनता से लिया गया लोन ( बॉन्ड के जरिये), विदेश से और आरबीआई से लिया गया लोन शामिल होता है.

वहीं पूंजीगत खर्च में मशीनरी, औजार, बिल्डिंग, हेल्थ सुविधा, शिक्षा पर किया गया खर्च शामिल होता है. जब सरकार के राजस्व से ज्यादा खर्च हो जाता है तो राजकोषीय घाटे की स्थित पैदा हो जाती है.

स्वतंत्र भारत का पहला बजट

स्वतंत्र भारत का पहला बजट षणमुगम चेट्टि ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया था. हालांकि इसमें सिर्फ अर्थव्यवस्था की समीक्षा की गई थी और कोई टैक्स नहीं लगाया गया था.

बजट में शामिल प्रस्तावों को संसद के अनुमोदन की जरूरत होती है. संसद की मंजूरी मिल जाने के बाद ये प्रस्ताव 1 अप्रैल से लागू हो जाते हैं और अगले साल 31 मार्च तक जारी रहते हैं. 1947 से लेकर अब तक देश में 73 आम बजट, 14 अंतरिम बजट या चार खास या मिनी बजट पेश किए जा चुके हैं.

षणमुगम शेट्टी के बाद वित्त मंत्री जॉन मथाई ने पहला संयुक्त-भारत बजट पेश किया था, इसमें रजवाड़ों के तहत आने वाले विभिन्न राज्यों का वित्तीय ब्योरा भी पेश किया गया था.

सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड किसके नाम?

मोरारजी देसाई ने वित्त मंत्री के तौर पर सबसे ज्यादा दस बार बजट पेश किया. बाद में वह देश के प्रधानमंत्री भी बने. वित्त मंत्री के तौर काम कर रहे वी.पी सिंह के इस्तीफे के बाद 1987-1989 के बीच राजीव गांधी ने बजट पेश किया था. एनडी तिवारी ने 1988-89 और एसबी चह्वाण ने 1989-90 का बजट पेश किया था. मधु दंडवते 1990-91 का बजट पेश किया था.

किसके नाम कितने बजट पेश करने का रिकॉर्ड

मोरारजी देसाई के बाद सर्वाधिक बजट पेश करने का रिकार्ड पी चिदंबरम के नाम है. उन्होंने नौ बार बजट पेश किया. संयुक्त मोर्चा के सरकार के वित्त मंत्री के तौर पर उन्होंने 1996 से लेकर 1998 तक बजट पेश किया. फिर यूपीए-1 और यूपीए-2 सरकार में बजट पेश किया.

प्रणब मुखर्जी ने आठ बार बजट पेश किया था. पहले 1982 से 1984 तक इंदिरा गांधी सरकार में वित्त मंत्री के तौर पर और फिर 2009 से 2012 तक मनमोहन सरकार के वित्त मंत्री के तौर पर .

यशवंत राव चह्वाण, सीडी देशमुख और यशवंत सिन्हा ने सात-सात बार बजट पेश किया.

मनमोहन सिंह और टीटी कृष्णमाचारी ने छह-छह बार बजट पेश किया.

मनमोहन सिंह का फ्री मार्केट बजट

चुनाव की वजह से मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री के तौर पर 1991-92 का अंतरिम बजट पेश किया था. इसके बाद कांग्रेस सत्ता में आई और मनमोहन सिंह ने 1991-92 का पूर्ण बजट पेश किया.

1992 और 1993 में पेश किए गए बजट में मनमोहन सिंह ने अर्थव्यवस्था को खोलने के कई प्रावधान किए. इनके तहत आयात ड्यूटी 300 फीसदी से घटा कर 50 फीसदी कर दी गई. 24 जुलाई 1991 को पेश इस बजट में आयात-निर्यात नीति में अहम बदलाव किए गए.

आयात के लिए लाइसेंसिंग नीति में राहत दी गई और निर्यात को बढ़ावा देने के कई प्रावधान किए गए. इस बजट ने वास्तव में भारतीय उद्योगों के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्द्धा के दरवाजे खोल दिए.

चिदंबरम का ड्रीम बजट

1997 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने जो बजट पेश किया था उसे 'ड्रीम बजट' कहा गया. इस बजट में उन्होंने कॉरपोरेट टैक्स और इनकम टैक्स में बड़ी कटौती की थी.

कॉरपोरेट टैक्स से सरचार्ज घटा दिया था. साथ ही कस्टम ड्यूटी 50 फीसदी से घटाकर 40 फीसदी कर दी थी. बजट में कर प्रावधानों को तीन अलग-अलग स्लैब में बांट दिया गया था.

बजट में काले धन पर रोक लगाने के लिए एक स्कीम- वॉलेंटरी डिसक्लोजर ऑफ इनकम स्कीम (VDIS) शुरू की गई थी, जिसका व्यापक असर हुआ और सरकार के राजस्व में भारी बढ़ोतरी हुई थी.


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