कंपनी का फ़ेसबुक से विवाद



मई 2020 में आई एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि एनएसओ ग्रुप ने यूज़र्स के फ़ोन में हैकिंग सॉफ्टवेयर डालने के लिए फ़ेसबुक की तरह दिखने वाली वेबसाइट का प्रयोग किया.

समाचार वेबसाइट मदरबोर्ड की एक जांच में दावा किया गया है कि एनएसओ ने पेगासस हैकिंग टूल को फैलाने के लिए एक फेसबुक के मिलता जुलता डोमेन बनाया.

वेबसाइट ने दावा किया कि इस काम के लिए अमेरिका में मौजूद सर्वरों का इस्तेमाल किया गया. बाद में फ़ेसबुक ने बताया कि उन्होंने इस डोमेन पर अधिकार हासिल किया ताकि इस स्पाइवेयर को फैसले से रोका जा सके.

हालांकि एनएसओ ने आरोपों से इनकार करते हुए उन्हें "मनगढ़ंत" करार दिया था.

इसराइली फर्म इससे पहले से ही फेसबुक के साथ कानूनी लड़ाई में उलझा हुआ है. 2019 में फेसबुक ने आरोप लगाया था कि एनएसओ ने जानबूझकर व्हाट्सएप पर अपने सॉफ्टवेयर को फैलाया ताकि लोगों के फ़ोन की सिक्युरिटी से समझौता किया जाए.


फ़ेसबुक के मुताबिक जिनके फ़ोन हैक हुए उनमें पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल थे.

सऊदी सरकार को बेचा सॉफ्टवेयर?

कंपनी पर सऊदी सरकार को सॉफ्टवेयर देने का भी आरोप है, जिसका कथित तौर पर पत्रकार जमाल खशोग्जी की हत्या से पहले जासूसी करने के लिए इस्तेमाल किया गया था.


अल ज़जीरा के पत्रकारों की जासूसी का आरोप

दिसंबर 2020 में साइबर सुरक्षा से जुड़े शोधकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कंपनी के बनाए गए स्पाइवेयर से अल जज़ीरा के दर्जनों पत्रकारों का फ़ोन कथित तौर पर हैक कर लिया गया था.

टोरंटो विश्वविद्यालय के सिटीज़न लैब की एक रिपोर्ट में टीवी एंकरों और अधिकारियों सहित 36 सदस्यों के कथित तौर पर हैकिंग का शिकार होने की बात कही गई थी.

आरोपों पर क्या कहती है कंपनी?

एनएसओ कंपनी हमेशा से दावा करती रही है कि ये प्रोग्राम वो केवल मान्यता प्राप्त सरकारी एजेंसियों को बेचती है और इसका उद्देश्य "आतंकवाद और अपराध के खिलाफ लड़ना" है.

कंपनी ने कैलिफ़ोर्निया की अदालत कहा था कि वह कभी भी अपने स्पाइवेयर का उपयोग नहीं करती है - केवल संप्रभु सरकारें करती हैं.

फेसबुक से जुड़े विवाद के दौरान कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा था, "हमें अपनी तकनीक और क्राइम और आतंकवाद से निपटने में इसकी भूमिका पर गर्व है, लेकिन एनएसओ अपने प्रोडक्ट का खुद इस्तेमाल नहीं करता."

"हमने कई बार ये बात साफ़तौर पर कही है कि एनएसओ के प्रोडक्ट केवल सत्यापित और अधिकृत सरकारी एजेंसियों को दिए जाते हैं और वही संचालित इन्हें संचालित करते हैं."

कोरोनाकाल में फिर सामने आया नाम

2020 में कंपनी ने ऐसे सॉफ़्टवेयर के निर्माण का दावा किया था जो कोरोनावायरस के फैलने की निगरानी और इससे जुड़ी भविष्यवाणी करने में मदद कर सकता है. इसके लिए मोबाइल फ़ोन डेटा का उपयोग करता है.

एनएसओ के मुताबिक वो दुनिया भर की सरकारों के साथ बातचीत कर रहा था और दावा किया था कि कुछ देश इसका परीक्षण भी कर रहे हैं.

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