पश्चिम के प्रतिबंध केवल रूस को ही प्रभावित नहीं करेंगे, स्वयं को भी हो सकता है नुक़सान
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिम ने माॅस्को के विरुद्ध प्रतिबंधों की घोषणा की है।
यूक्रेन पर हमले के पश्चात पश्चिमी नेताओं ने रूस के विरुद्ध प्रतिबंधों की घोषणा की है। यूरोपीय संघ के अधिकारियों ने रूस के वित्तीय, ऊर्जा और परिवहन क्षेत्रों को अपने प्रतिबंधों में शामिल किया है।
फ़्रांस के विदेशमंत्री का कहना है कि इन प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य रूस को आर्थिक दृष्टि से पंगु बनाना है। कनाडा ने भी रूस के विरुद्ध प्रतिबंध लगाए हैं।
यूक्रेन पर हमले के बहाने अमरीका ने भी रूस पर अभूतपूर्व प्रतिबंधों की घोषणा की है। अमरीका का मानना है कि यह प्रतिबंध रूस को वैश्विक वित्ती प्रणाली से अलग-थलग कर देंगे और इनसे अत्याधुनिक तकनीक तक माॅस्को की पहुंच बाधित होगी।
अमरीकी अधिकारियों के अनुसार रूस के विरुद्ध प्रतिबंध, रूसी अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाने के पुतीन के महत्वाकांक्षी इरादे पर लगाम लगाएंगे। अमरीका का कहना है कि वह रूस दो बड़े वित्तीय संस्थानों साइबर बैंक और वीटीबी पर प्रतिबंध लगाएंगे जिनके पास 750 अरब डाॅलर से अधिक की संपत्ति है।
वीटीबी के मामले में वित्तीय प्रणाली से जुड़ी सारी संपत्तियों को फ्रीज़ कर दिया जाएगा और साइबर बैंक के संबन्ध में अमरीकी वित्तीय प्रणाली तक इसकी पहुंच समाप्त कर दी जाएगी। क्योंकि अमरीका ने पहले ही रूस के विरुद्ध प्रतिबंधों की घोषणा कर दी थी इसलिए एसा लगता है कि माॅस्को किसी सीमा तक इसके लिए मानसिक दृष्टि से तैयार था। रूस के विदेश मंत्रालय ने एलान किया है कि प्रतिबंधों के विरुद्ध वह कुछ कड़े क़दम उठाएगा।
अगर रूस के विरुद्ध यूरोपीय प्रतिबंधों की बात जाए तो इस बारे में कहा जा सकता है कि रूस की गैस पर यूरोप की काफी निरभर्ता है। एसे में यूरोपीय संघ रूस के विरुद्ध कड़े प्रतिबंध लगाने की स्थिति में नहीं है। वर्तमान समय में जब यूरोप में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है, तेल की आपूर्ति में विघ्न, वहां के लिए बहुत हानिकारक हो सकता है।शायद यही कारण है कि यूरोप में रूस पर प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर सब एकमत नहीं हैं।
यूरोप की ज़रूरत की 40 प्रतिशत गैस की आपूर्ति रूस करता है। यदि उसपर प्रतिबंध लगाए जाते हैं तो फिर बदले में वह गैस की आपूर्ति को रोक सकता है। यही कारण है कि कई यूरोपीय देश रूस के विरुद्ध प्रतिबंधों विशेषकर स्विफट पर प्रतिबंधों के हित में नहीं हैं।
राजनैतिक विशलेषकों का कहना है कि रूस के विरुद्ध पश्चिम के आर्थिक प्रतिबंध एसी दोधारी तलवार की तरह है जो दोनो पक्षों को प्रभावित कर रही है। यूक्रेन युद्ध को आरंभ हुए अभी कुछ ही दिन गुज़रे हैं किंतु अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुत सी चीज़ों की क़ीमतों में वृद्धि हुई है।
इस संबन्ध में अपनी चिंता ज़ाहिर करते हुए विश्व मुद्रा कोष आईएमएफ के प्रमुख क्रिस्टेलिना जार्जिवा का कहना है कि यह विषय न केवल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ख़तरनाक हो सकता है।
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