हिजाब विवाद पर 'दंगल' फेम जायरा वसीम ने रखी राय, कहा- ये पसंद नहीं ज़िम्मेदारी का मामला




हिजाब विवाद पर जावेद अख्तर, शबाना आजमी, कंगना रनौत समेत कई बॉलीवुड हस्तियां अपना रुख जाहिर कर चुकी हैं. अब 'दंगल' और 'सीक्रेट सुपरस्टार' फेम अभिनेत्री जायरा वसीम ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है.

उनका कहना है कि इस्लाम में हिजाब पहनना पसंदगी का मामला नहीं बल्कि ज़िम्मेदारी है. जो महिला हिजाब पहनती है वह उस अल्लाह की ओर से सौंपी गई ज़िम्मेदारी को पूरा करती है, जिससे वह प्यार करती है और जिसे उसने ख़ुद को समर्पित कर दिया है.

कर्नाटक के उडुपी जिले के एक कॉलेज में हिजाब पहन कर आने वाली छात्राओं के ख़िलाफ़ भगवा शॉल पहन कर आए छात्रों के विरोध के बाद यह मामला पूरे देश में चर्चित हो गया है. हिजाब के समर्थन और विरोध में राजनीतिक दलों से लेकर बॉलीवुड के स्टार भी कूद पड़े हैं.

कर्नाटक हाई कोर्ट में फिलहाल इस मामले की सुनवाई हो रही है. सुनवाई पूरी होने तक महिलाओं को हिजाब पहन कर कॉलेज आने से रोक दिया गया है.

वसीम ने अपने फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा है कि एक औरत होने के नाते वह पूरी विनम्रता और कृतज्ञता के साथ हिजाब पहनती हैं. उनकी उस पूरी व्यवस्था से नाराज़गी और विरोध है, जहां महिलाओं को सिर्फ़ अपनी धार्मिक प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की वजह से प्रताड़ित किया जा रहा है.

हिजाब पहन कर आने वाली छात्राओं को कॉलेज में घुसने न देने के मामले पर जायरा वसीम ने लिखा है, ''मुस्लिम महिलाओं के ख़िलाफ़ एक बड़ा पूर्वाग्रह खड़ा किया जा रहा है. एक ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है, जहां उन्हें हिजाब या शिक्षा के बीच किसी एक को चुनना होगा. यह पूरी तरह अन्याय है.''

सशक्तिकरण के नाम पर महिलाओं के साथ हो रहा बुरा'

वसीम लिखती हैं, ''इस वजह से उनके पास एक ख़ास विकल्प को अपनाने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचता है और यह आपके एजेंडे के मुफ़ीद बैठता है. जब वो आपके एजेंडे में कैद हो जाती हैं तो आप उनकी आलोचना करते हैं.''

वह लिखती हैं, "अब उन्हें दूसरा विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचता. इन सबसे ऊपर यह दिखावा करना कि यह सब सशक्तिकरण के नाम पर किया जाना और भी बुरा है. यह बड़े दुख की बात है."

कर्नाटक हाई कोर्ट में हिजाब पर सुनवाई जारी

कर्नाटक हाई कोर्ट में हिजाब पहनने से रोके जाने के ख़िलाफ़ छात्राओं की याचिका पर सुनवाई जारी है. अगली सुनवाई 21 फ़रवरी को होगी. छात्राएं हिजाब विवाद पर आने वाले फ़ैसले का इंतज़ार कर रही हैं. फ़ैसला आने तक छात्राओं को शैक्षणिक संस्थानों हिजाब पहन कर आने से रोक दिया गया है. कर्नाटक के कई शैक्षणिक संस्थानों में इस वजह से कुछ मुस्लिम छात्राएं नहीं आ रही हैं.

छात्राओं के वकील ने कोर्ट में क्या कहा?

पिछली सुनवाई में याचिका दायर करने वाली छात्राओं की ओर से दलील रखते हुए उनके वकील रवि वर्मा कुमार ने कहा कि अकेले हिजाब को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है. जब दुपट्टा, चूड़‍ियां, पगड़ी, क्रास और बंदी जैसे सैकड़ों धार्मिक प्रतीक चिन्‍ह लोग रोज पहनते हैं.

उन्‍होंने कहा, "मैं केवल समाज के सभी वर्गों में धार्मिक प्रतीकों की विविधता को उजागर कर रहा हूं. सरकार अकेले हिजाब को चुनकर भेदभाव क्‍यों कर रही है? पगड़ी पहन कर लोग सेना में अपनी सेवाएं देते हैं. चूड़‍ियां पहनी जाती हैं? क्‍या वे धार्मिक प्रतीक नहीं है? आप इन गरीब मुस्लिम लड़कियों को ही क्‍यों चुन रहे हैं."

कुमार ने कहा, "किसी और धार्मिक प्रतीक पर विचार नहीं किया जाता... केवल हिजाब क्‍यों? क्‍या यह इनके धर्म के कारण नहीं. मुस्लिम छात्राओं के ख़िलाफ़ भेदभाव साफ़तौर पर धर्म के आधार पर है, इसलिए यह शत्रुतापूर्ण भेदभाव है. संविधान का अनुच्छेद-15 इसकी इजाजत नहीं देता.

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