सात साल बाद सऊदी अरब का क़बूलनामा


सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने कहा है कि उनके देश को इस बात का विश्वास था कि यमन युद्ध ज़्यादा लंबा नहीं खींचेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और यमन युद्ध हमारी सोच से भी कहीं ज़्यादा लंबा खींच गया।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, सऊदी अरब के विदेश मंत्री फ़ैसल बिन फ़रहाद आले सऊद ने जर्मनी के एक टीवी चैनल को दिए इंटर्व्यू में इस बात को स्वीकार किया है कि यमन युद्ध आले सऊद की सोच से बहुत ज़्यादा लंबा खींच गया है। फ़रहान आले सऊद ने कहा कि यमन पर सऊदी अरब के सैन्य आक्रमण का उद्देश्य मंसूर हदी की अपदस्थ सरकार की रक्षा करना था। लेकिन इसमें रियाज़ की अपेक्षा से कहीं अधिक समय लग गया है। उन्होंने यमन पर मार्च 2015 में शुरू हुए व्यापक हमले का उल्लेख किए बिना दावा किया कि सऊदी अरब यमन संकट को हल करने के लिए एक राजनीतिक प्रक्रिया खोजने के अपने प्रयास जारी रखे हुए है। इसी तरह सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने यमन में जारी युद्ध के लिए इस देश की राष्ट्रीय मुक्ति सरकार को ही दोषी ठहराने का प्रयास किया। याद रहे कि यमनी सेना और स्वयंसेवी बल लगातार सऊदी गठबंधन और उसके भाड़े के सैनिकों द्वारा यमन के इलाक़ों पर किए गए क़ब्ज़े को आज़ाद कराने के लिए अभियान चलाए हुए है

ग़ौरतलब है कि यमन युद्ध इस समय अपने सबसे संवेदनशील चरण में है। यमनी सेना और स्वयंसेवी बल सात वर्षों के कड़े संघर्ष और बलिदान के बाद आज इस स्थिति में है कि अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के समर्थन वाले सऊदी गठबंधन को युद्ध के हर मोर्चे पर पराजित करने में कामयाब हो रहे हैं। आज की तारीख़ में यमनी सेना और स्वयंसेवी बल के ड्रोन विमान और मिसाइलें सऊदी अरब और उसके सहयोगियों के लिए एक डरावना सपना बन गए हैं। उल्लेखनीय है कि सऊदी अरब ने अमेरिका, संयुक्त अरब इमारात और कुछ अन्य देशों की मदद से मार्च 2015 से यमन पर पाश्विक हमले आरंभ किया था, साथ ही पश्चिमी एशिया के इस सबसे ग़रीब देश की पूर्णरूप से हवाई, ज़मीनी और समुद्री घेराबंदी कर ली है। यमन पर सऊदी अरब और उसके सहयोगियों द्वारा थोपे गए युद्ध के कारण अब तक हज़ारों यमनी शहीद और दसियों हज़ार घायल हो चुके हैं, जबकि लाखों यमनी बेघर हो चुके हैं। (RZ)


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