पश्चिमी और अरब देश यमनी और यूक्रेनी लोगों के संबंध में दोहरे मापदंड से काम ले रहे हैं"यमन के उपविदेशमंत्री
यमन के उपविदेशमंत्री ने कहा है कि पश्चिमी और कुछ अरब देश यमनी और यूक्रेनी लोगों के संबंध में दोहरे मापदंड से काम ले रहे हैं।
हुसैन अलइज़्ज़ी ने अपने ट्वीटर हैंडल पर लिखा है कि इतिहास इस बात को नहीं भूलेगा कि कुछ अरब देशों ने यूक्रेन के लोगों का वीज़ा निरस्त कर दिया ताकि यूक्रेनवासियों से अपनी सहानुभूमि की घोषणा करें किन्तु जो युद्ध सात साल से यमन पर थोप दिया गया है उसे जारी रखे हुए हैं।
20 दिन से कम का समय बाकी है जब यमन युद्ध को जारी हुए आठ साल हो जायेंगे। 26 मार्च 2015 से सऊदी अरब ने यमन के खिलाफ पाश्विक हमलों का आरंभ किया था और अब तक चालिस लाख से अधिक यमनी बेघर हो चुके हैं। इसी प्रकार सऊदी अरब के पाश्विक हमलों में दसियों हज़ार यमनी मारे जा चुके हैं। मारे जाने वालों में ध्यान योग्य संख्या बच्चों और महिलाओं की है।
21वीं सदी में यमन की निर्दोष जनता और लोगों को सात वर्षों से अधिक समय से सऊदी अरब के पाश्विक हमलों का सामना है। सऊदी अरब ने सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना यमन के निर्दोष लोगों के खिलाफ अपना पाश्विक हमला आरंभ कर रखा है। यही नहीं सऊदी अरब ने जल, थल और हवा से यमन का कड़ा परिवेष्टन कर रखा है। उसके इस परिवेष्टन के कारण यमनी लोगों को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना है।
सऊदी अरब के इस परिवेष्टन के कारण खाद्य पदार्थों, दवाओं और दूसरी बहुत सारी ज़रूरी चीज़ों की कमी का सामना है। रोचक बात यह है कि मानवाधिकारों की रक्षा का राग अलापने वाले कभी भी सऊदी अरब के पाश्विक अपराधों की भर्त्सना तक नहीं करते। यही नहीं अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे मानवाधिकारों की रक्षा का दम भरने वाले देश सऊदी अरब को हथियार देते हैं और सऊदी अरब उन्हीं हथियारों से यमन के निर्दोष लोगों की हत्या करता है और मानवाधिकारों की रक्षा का दम भरने वाले मूक दर्शक बने और अर्थपूर्ण चुप्पी साधे हुए हैं।
रोचक बात है कि अभी 24 फरवरी को यूक्रेन युद्ध आरंभ हुआ है और प्राप्त समाचारों के अनुसार अभी तक एक हज़ार भी यूक्रेन के आम नागरिक नहीं मारे गये हैं परंतु अमेरिका और उसके घटक यूक्रेन के समर्थन में लामबंद हो गये हैं और रूस के खिलाफ कड़ा से कड़ा प्रतिबंध लगा रहे हैं।
यही नहीं अमेरिका और पश्चिमी देश यूक्रेन के समर्थन के लिए हथियारों की खेप भेज रहे हैं। यद्यपि युद्ध किसी भी रूप में स्वीकार नहीं है क्योंकि उसमें आम तौर पर निर्दोष लोग मारे जाते हैं परंतु यूक्रेन और यमन युद्ध की एक दूसरे से तुलना नहीं की जा सकती। कुछ अरब देश बेघर होने वाले यूक्रेनी लोगों के संबंध में मानवाधिकार का राग अलाप रहे हैं जबकि इन देशों के हाथ यमनी जनता के खून से या रंगे हुए हैं या वे अर्थपूर्ण चुप्पी साधे हुए हैं।
यही हाल अमेरिका और उसके घटकों का है आज ये देश उस स्थिति में यूक्रेन युद्ध की भर्त्सना कर रहे हैं जबकि यही देश सात वर्षों से यमनी जनता के खिलाफ जारी पाश्विक पाश्विक अपराधों पर मौन धारण किये हुए हैं।
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