भारत में पेट्रोल-डीज़ल के दामों में अच्छी ख़ासी बढ़ोतरी की तैयारी- प्रेस रिव्यू
यूक्रेन संकट और ईरान के तेल के वैश्विक बाज़ार में आने में हो रही देरी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत रिकॉर्ड तोड़ रही है. कहा जा रहा है कि भारत में भी इसका असर जल्द ही दिख सकता है.
पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव ख़त्म होने के बाद भारत में भी तेल के दाम 5 से 6 रुपये प्रति लीटर बढ़ सकते हैं.
अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस ख़बर को प्रमुखता से छापा है. आज के प्रेस रिव्यू में सबसे पहले यही ख़बर पढ़िए.
मामले के जानकारों ने बताया है कि सरकार में इस बात को लेकर विचार-विमर्श चल रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के असर को कम करने के लिए कुछ सरकारी ईंधन विक्रेताओं को 5-6 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने की मंज़ूरी दी जाए.
इससे खुदरा विक्रेताओं को अभी तक हो रहे नुकसान की भरपाई करने में मदद मिलेगी. फ़िलहाल विक्रेताओं को 12 रुपये प्रति लीटर का घाटा झेलना पड़ रहा है.
टैक्स में कटौती को लेकर फ़िलहाल कोई विचार नहीं किया जा रहा. हालांकि, अगर लंबे समय तक कच्चे तेल के दाम बढ़ते रहे तो ये क़दम भी उठाया जा सकता है. उस स्थिति में केंद्र और राज्य सरकारें दोनों ही टैक्स में रियायत देंगी. इससे तेल कंपनियों का नुक़सान कुछ सीमा तक कम होगा और उपभोक्ताओं पर बोझ भी घटेगा.
ऐसी भी अटकलें हैं कि विक्रेताओं को 10 मार्च यानी चुनाव परिणाम आने तक इंतज़ार करने को कहा जाए.
पेट्रोल-डीज़ल के दाम चार नवंबर से नहीं बढ़े हैं. उस समय केंद्र और राज्य सरकारों ने टैक्स में कटौती करते हुए राहत दी थी. हालांकि, उस वक़्त अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल के दाम 83 डॉलर प्रति बैरल ही थे.
उद्योग जगत पर नज़र रखने वालों का कहना है कि इससे रुपये की गिरती क़ीमतों से भी थोड़ी राहत मिलेगी. सोमवार को एक डॉलर की तुलना में भारतीय रुपये की कीमत क़रीब 77 रुपये तक गिर गई. ये अब तक का सबसे निचला स्तर है. रुपये की क़ीमत गिरने से खुदरा विक्रेता अभी तक जो मुनाफ़ा कमा भी पा रहे थे वो और भी मुश्किल हो जाएगा.
अमेरिका और यूरोप के देशों द्वारा रूस से गैस और तेल के आयात पर प्रतिबंधों की आशंका के बीच तेल के दाम तेज़ी से बढ़े हैं. विश्व भर में गैस की आपूर्ति का 8 फ़ीसदी हिस्सा रूस से जाता है, वहीं यूरोपिय देशों में ये आंकड़ा 35 प्रतिशत है.
यूक्रेन पर रूस के आक्रमण का 12वां दिन है. भारत सरकार के ऑपरेशन गंगा के तहत अभी तक हज़ारों छात्रों को वतन वापस लाया गया है लेकिन सूमी में अभी भी 700 के आसपास छात्र फंसे हैं.
सोमवार को इन छात्रों को बसों में बैठाया गया ताकि सुरक्षित सीमा क्षेत्र तक पहुँचाया जा सके लेकिन तभी संघर्षविराम टूटा और उसके साथ ही छात्रों की घर वापसी की आस भी टूट गई.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू की ख़बर के मुताबिक, अब सुमी स्टेट यूनिवर्सिटी में ही भारतीय छात्र बचे हैं. ये इलाक़ा रूस की सीमा से सटा हुआ है और हमले की शुरुआत से ही यहां छात्र फंसे हुए हैं.
सोमवार को रूस ने कीएव, खारकीएव, मारियुपोल और सुमी में संघर्षविराम का ऐलान करते हुए नागरिकों को सुरक्षित निकालने पर सहमति जताई.
इसके बाद छात्रों को बसों में पास के पोलतावा शहर के रेलवे स्टेशन तक ले जाया जा रहा था. इससे एक दिन पहले यानी रविवार को ही भारतीय दूतावास ने पोलतावा में बचाव अभियान की निगरानी के लिए अपनी टीम तैनात कर दी थी.
सुमी में फंसी एक भारतीय छात्रा ज़ारा अज़न ने बताया, "मैं, हमें सुमी से निकालने के लिए आई एक बस में थी. हम तैयार थे लेकिन तभी अचानक हमें आगे बढ़ने से रोक दिया गया. हमें बताया गया कि किसी जगह या पोलतावा के रास्ते में कहीं संघर्षविराम टूट गया है. इसके बाद हमने अपनी बसों में क़रीब एक घंटा इंतज़ार किया. फिर हमें वापस हमारे हॉस्टर भेजने का फैसला किया गया."
मंगलवार को क्या फिर से एक बार छात्रों को निकालने की कोई योजना है, इस सवाल पर हितेश कुमार गुज्जर नाम के शख्स ने कहा, "अभी तक हमें कोई निर्देश नहीं मिले हैं. हम सिर्फ इंतज़ार कर रहे हैं. हमारे पास सिर्फ़ उम्मीद ही बची है."
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