योगी आदित्यनाथ का पांच लाख युवाओं को नौकरियां देने का दावा कितना सच?: बीबीसी रियलिटी चेक
उत्तर प्रदेश की सरकार और उसे चलाने वाली पार्टी का दावा है कि राज्य में बड़े पैमाने पर युवाओं को रोज़गार मिला है, लेकिन सच्चाई क्या है?
सरकार का दावा: "हमने पांच लाख लोगों को नौकरियां दी है और किसी एक नियुक्ति पर कोई सवाल नहीं है, इसकी वजह हमारी पारदर्शी और ईमानदार सरकार का होना है."
फैक्ट चेक: इस दावे में नौकरी की संख्या की पुष्टि करने वाला कोई सटीक आंकड़ा मौजूद नहीं है, इसलिए इस दावे की जांच करना संभव नहीं है.
राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के जौनपुर में एक रैली में यह दावा किया था. इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी ने अपने संकल्प पत्र में भी पांच लाख युवाओं को रोज़गार देने की बात कही है.
बीबीसी ने सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए प्रशिक्षण एवं रोज़गार निदेशालय और शहरी रोज़गार एवं ग़रीबी उन्मूलन विभाग से नवंबर में राज्य में 2012 से 2021 के बीच रोज़गार संबंधी आंकड़े मांगे थे. प्रशिक्षण एवं रोज़गार निदेशालय से सात फ़रवरी को मिले जवाब में कहा गया कि ये जानकारी उनके विभाग के दायरे में नहीं आती.
वहीं शहरी रोज़गार एवं ग़रीबी उन्मूलन विभाग से कोई जवाब नहीं मिला है. कितने लोगों को सरकारी नौकरियां मिलीं इसकी जानकारी अस्पष्ट है.
बीबीसी ने इसके बारे में राज्य सरकार से भी जवाब मांगा लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला.
वहीं दूसरी ओर चेन्नई स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) देश के सभी राज्यों में बेरोज़गारी को लेकर सर्वे कराती है. इस संस्था के मुताबिक उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने अप्रैल, 2017 में सत्ता संभाली और उस वक़्त राज्य के 7.8 लाख बेरोज़गार स्नातक नौकरियां तलाश रहे थे.
सीएमआईई के मुताबिक अप्रैल, 2019 में बेरोज़गार स्नातकों की संख्या बढ़कर 21 लाख हो गई. जब अप्रैल, 2020 में कोविड महामारी का दौर शुरू हुआ तो बेरोज़गार स्नातकों की संख्या बढ़कर 22.3 लाख हो गई थी, लेकिन दिसंबर, 2021 में इनकी संख्या गिरकर 13.8 लाख रह गई है.
अप्रैल, 2020 से दिसंबर, 2021 के बीच नौकरी करने या नौकरी हासिल करने के कोशिश करने वाले युवाओं में- स्नातकों का प्रतिशत 58.8 से गिरकर 51.4 रह गया था.
अप्रैल, 2017 के बाद से कामकाजी आबादी की उम्र में 12 प्रतिशत बढ़ी है लेकिन फिर भी कई लोग नौकरियों से बाहर निकलने का विकल्प चुन रहे हैं.
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सीएमआईई के प्रबंध निदेशक महेश व्यास ने बीबीसी से कहा, "रोज़गार के अवसरों की कमी के चलते लोग यूपी के मानव संसाधन बल से बाहर निकल रहे हैं." राज्य के जॉब पोर्टल रोज़गार संगम पर मौजूदा समय में 4.13 लाख सक्रिय युवा हैं, जिन्हें नौकरी की तलाश है, इनके बरअक्स 51 वास्तविक रिक्तियां हैं.
जनवरी में बिहार और यूपी में छात्रों का विरोध प्रदर्शन देखने को मिला था, यह विरोध प्रदर्शन ही इस बात से शुरू हुआ था कि रेलवे भर्ती बोर्ड की 35 हज़ार रिक्तियों के लिए एक करोड़ 25 लाख लोगों ने आवेदन दिया था.
कर्नाटक स्थित अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी ने भारत में कामकाजी स्थिति पर एक रिपोर्ट जारी की है, इस रिपोर्ट में नौकरियों पर कोविड महामारी के प्रभाव को आंका गया है. इसके मुताबिक यूपी में सितंबर, 2019 से दिसंबर, 2020 के बीच 56.2 प्रतिशत स्थायी वेतन वाले कर्मचारी की नौकरियां अस्थायी नौकरियों में तब्दील हुई है. ज़ाहिर है कि स्थायी नौकरियों की संख्या कम हुई है.
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