रेगिस्तानी क्षेत्रों में पानी भंडारण का अनोखा तरीका
पीने के पानी का संरक्षण, हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है और इंसान इस मुद्दे को लेकर चिंतित रहा है। ईरान में पानी के जलाशयों का निर्माण करके काफ़ी हद तक इस चिंता का समाधान निकाला गया था। पानी का भंडार, पानी के संरक्षण का एक अच्छा तरीक़ा माना जाता था। अन्य मनोरंजनों के अलावा, इससे गर्म और सूखे इलाक़ों में ज़िंदगी गुज़ारना संभव हो पाता था। प्राचीन ईरान में पानी को एक पवित्र प्राकृतिक तत्व माना जाता था। ईरानी पानी को इतना पवित्र मानते थे कि अपने वतन को आब व ख़ाक यानी पानी और मिट्टी कहते थे। प्राचीन ईरान में पानी का एक विशेष स्थान था। ऐसी धारणा थी कि पानी की एक देवी है, जिसका नाम अनाहीता था। उस ज़माने के लोगों का विश्वास था कि पानी की देवी, झरनों और वर्षा की संरक्षक और उर्वरता, प्रेम और मित्रता की प्रतीक रही है। शायद इस सरज़मीन की अर्ध-शुष्क जलवायु का पानी का, पानी के महत्व पर काफ़ी असर रहा है। जलसेतू जैसी तकनीक के साथ-साथ जलाशयों ने उन दिनों ईरानियों के जीवन में क्रांति बरपा कर दी थी। पानी का भंडार एक हौज़ या इनडोर पूल होता है, जिसे पानी जमा करने के लिए ज़मीन के भीतर बनाया जाता है। कम पानी वाले...