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अमरीकी रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय में ठनी, अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर ब्लिंकन के ख़िलाफ़ हो सकती है जांच

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अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका को मिलने वाली भारी शिकस्त के बाद अमरीकी संस्थाएं एक दूसरे को कोसने लगी हैं। अमरीकी सेना के चेयरमैन ज्वाइंट चीफ़्स आफ़ स्टाफ़ जनरल मार्क मेली ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान से अमरीकी सैनिकों और नागरिकों के निकलने में होने वाली देरी के लिए विदेश मंत्रालय ज़िम्मेदार है। अमरीकी मीडिया में आने वाली ख़बरों के अनुसार मार्क मेली ने सेनेट की बंद दरवाज़ों के पीछे होने वाली बैठक में अमरीकी विदेश मंत्रालय को दोषी ठहराया। मार्क मेली का कहना था कि विदेश मंत्रालय ने काबुल एयरपोर्ट से बाहर निकलने के आदेश जारी करने में काफ़ी समय बर्बाद कर दिया। सेनेट की दो बैठकों में अमरीकी रक्षा मंत्री लुइड आस्टिन और पेंटागोन के कई अधिकारी शामिल हुए। मंगलवार और बुधवार को होने वाली बैठकों में अमरीकी रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के बीच आरोप प्रत्यारोप की स्थिति देखने में आई। अमरीकी मीडिया का कहना है कि अगर यह बैठकें आगे भी जारी रहीं तो अमरीकी विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन के कामकाज के तरीक़े की जांच शुरू हो सकती है। इस समय अफ़ग़ानिस्तान से अमरीका के आनन फ़ानन में निष्कासन और उस समय उत्पन्न होने वाली ...

ब्रिटेन में भारी पैट्रोल संकट, मीलों लम्बी क़तारें और आपस में झगड़ते लोगों की वजह से देश में दहशत

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 ब्रिटेन में पैट्रोल और ईंधन के संकट के चलते इन दिनों लोगों को पेट्रोल पंपों पर मीलों लंबी क़तारों में लगकर तेल के लिए तरसना पड़ रहा है। पेट्रोल पंपों पर तेल के इंतजार में लंबी-लंबी लाइनें लगी है। ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था के पहिए थम से गए हैं और इसकी वजह यहां तेल संकट की स्थिति बनी हुई है। ब्रिटेन के तमाम बड़े शहरों में लोग रोज़ घरों से तेल की तलाश में निकल रहे है और गाड़ी में बिना तेल भरवाए ही वापस आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल कई वीडियो में पेट्रोल पंपों के बाहर मीलों लंबी क़तारें दिखाई दे रही हैं, इसके अलावा घबराए नागरिक पानी की छोटी-छोटी बोतलों में भी जितना हो सके उतना पेट्रोल जमा कर रहे हैं। ब्रिटेन के कई पेट्रोल पंपों पर तेल की ख़रीदारी को लेकर लोगों में दहशतह है और कई जगह इसके लिए लोग आपस में भिड़ रहे हैं और मारपीट कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, ब्रिटेन में तेल की कमी की एक वजह तेल टैंकरों के ड्राइवरों की कमी है। अनुमान के मुताबिक़ ब्रिटेन में इस समय करीब 1 लाख से अधिक ट्रक ड्राइवरों की कमी हो गई है। यह ड्राइवर ब्रिटेन के तेल और फ़ूड चेन सप्लाई की रीढ़ की हड्डी म...

जेल से रिहा होने के बाद शेख़ ज़कज़की का पहला इंटरव्यू, कई रहस्यों से उठाया पर्दा

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नाइजीरिया के सबसे प्रभावशाली धर्मगुरु माने जाने वाले शेख़ इब्राहीम ज़कज़की ने प्रेस टीवी के साथ ख़ास बातचीत में कहा है कि अगर देश में आज जनमत संग्रह का आयोजन करवाया जाए तो निश्चित रूप से अधिकांश नाइजीरियाई इस्लामी शासन प्रणाली के विकल्प का चयन करेंगे। जुलाई में जेल से रिहा होने के बाद प्रेस को दिए गए अपने पहले इंटरव्यू में उन्होंने कहाः मेरा मानना ​​​​है कि अगर देश में जनमत संग्रह करवाया जाए और लोगों से पूछा जाए वे कौन सी व्यवस्था पसंद करेंगे? क्या मौजूदा व्यवस्था को जारी रखना चाहेंगे, जो ब्रिटिश उपनिवेश से विरासत में मिली है, या इस्लामी व्यवस्था पसंद करेंगे? आयतुल्लाह ज़कज़की कहना था कि नाइजीरियाई अधिकारियों ने सख़्ती से इस तरह के किसी भी जनमत संग्रह के प्रस्ताव को रद्द कर दिया है, लेकिन वह नाइजीरिया में इस तरह की व्यवस्था की स्थापना की संभावना से इंकार नहीं कर सकते। हालांकि उनका यह भी कहना था कि यह लोगों पर निर्भर करता है कि वे दिए गए विकल्पों में से किसे चुनना चाहते हैं, जैसा कि 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद जनमत संग्रह हुआ था। उनका कहना था कि नाइजीरियाई अधिकारिय...

आईएईए की पारदर्शिता की पोल खुल गयी आकस समझौता जटिल है लेकिन मैनेज के क़ाबिल है

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अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी आईएईए के महानिदेशक ने कहा है कि आकस के नाम से प्रसिद्ध अमरीका, ब्रिटेनि और आस्ट्रेलिया के बीच होने वाले समझौते की समीक्षा करना बहुत ही जटिल और कठिन काम है। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी आईएईए के महानिदेशक रफ़ाएल ग्रोसी ने दावा किया है कि यद्यपि यह समझौता बहुत जटिल अवश्य है लेकिन उनके कथानानुसार मैनेज किया जा सकता है। अमरीका, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया के प्रमुखों ने हाल ही में हिन्द महासागर और प्रशांत महासागर के क्षेत्र के बारे में कूटनयिक, सुरक्षा और सामरिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं जिसके अंतर्गत परमाणु पनडुब्बियों की तैयारी में आस्ट्रेलिया की मदद की जाएगी। विदेशी मीडिया हल्क़ों और मीडिया सत्रों का कहना है कि इस नये समझौते का मुख्य उद्देश्य, पूर्वी एशिया और दुनिया के अन्य क्षेत्रों में चीन के बढ़ते हुए प्रभाव का मुक़ाबला करना है और इस कार्यवाही पर बीजिंग और उसके घटकों की ओर से किसी भी प्रकार की ठोस प्रतिक्रिया का आना निश्चित है। 

अमरीकी सैन्य कमान्डरों ने किया स्वीकार, अफ़ग़ानिस्तान में हुई बड़ी ग़लतियां

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अमरीकी युद्धमंत्री ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में हमने बड़ी ग़लतियां की हैं। अमरीका के युद्धमंत्री लुइड आस्टिन और अमरीकी सेना के चेयरमैन ज्वाइंट आफ़ स्टाफ़ जनरल मार्क मेली ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान से निकलने की वजह से अमरीका की साख को बहुत नुक़सान पहुंचा है। सीनेट कमेटी के सामने तर्क देते हुए युद्धमंत्री लुइड आस्टिन और अमरीकी सेना के चेयरमैन ज्वाइंट आफ़ स्टाफ़ जनरल मार्क मेली और सेन्ट्रल कमान्ड के चीफ़ जनरल फ़्रैंक मैकेन्ज़ी ने अफ़ग़ानिस्तान से अमरीकी सैनिकों के निकलने और निष्कासन के तरीक़े का बचाव किया। अमरीका के युद्धमंत्री लोइड आस्टीन ने यह बात स्वीकार करते हुए कि अमरीकी सरकार ने पूर्ण रूप से सक्रिय संस्थाओं के साथ राष्ट्र को धोखा देने की कोशिशों में बहुत समय लगाया। अमरीकी सेना के चेयरमैन ज्वाइंट चीफ़ आफ़ स्टाफ़ जनरल मार्क मेली ने कहा कि वाशिंग्टन के अफ़ग़ानिस्तान से निकलन के फ़ैसले और उसके परिणाम स्वरूप दुनियाभर में अमरीका की साख को बहुत नुक़सान पहुंचा, जबकि दूसरी ओर पेन्टागन के प्रमुख ने कहा कि तालेबान और अफ़ग़ान सरकार के बीच अमरीका की भूमिका से अफ़ग़ान सैनिकों का हौसला पस्त हुआ।...

नाइजीरिया , अरबईन मार्च पर हमला, कई श्रद्धालु शहीद और घायल

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     नाइजीरिया की धरती फिर हुई लहुलुहान, अरबईन मार्च पर फिर हमला, कई श्रद्धालु शहीद और घायल+ वीडियो अफ़्रीक़ी देश नाइजीरिया में हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का चेहलुम मनाने वाले श्रद्धालुओं पर सुरक्षा बलों ने हमला कर दिया जिसके परिणाम में हताहत होने वालों की संख्या बढ़कर 8 हो गयी है। नाइजीरिया की पुलिस ने राजधानी अबूजा में हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के श्रद्धालुओं पर हमला किया जिसमें दर्जनों श्रद्धालुओं के घायल होने की भी सूचना है। रिपोर्ट में बताया गया है कि हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के चेहलुम या अरबईन के अवसर पर राजधानी अबूजा की एक सड़क पर अरबई मार्च निकाला जा रहा था जिस पर सुरक्षाकर्मियों ने हमला कर दिया। नाइजीरिया के इस्लामी आंदोलन के सदस्य अब्दुल्लाह मुहम्मद का कहना है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण ढंग से अरबईन मार्च करने वाले श्रद्धालुओं पर अकारण फ़ायरिंग शुरु कर दी जिसमें 8 श्रद्धालु शहीद हो गये। इससे पहले एक श्रद्धालु और उसके बाद तीन श्रद्धालुओं के शहीद होने की ख़बर सामने आई थी। नाइजीरिया की पुलिस ने इसी तरह अरबईन मार्च में शामिल हज़ारों श्रद्धालुओं को गिरफ़्तार भी ...

उत्तरी कोरिया ने किया हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण

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उत्तरी कोरिया ने एक हाइपरसोनिक मिसाइल के सफल परीक्षण की घोषणा की है। उत्तरी कोरिया की सरकारी ने बुधवार की सुबह पियुंगयांग द्वारा एक हाइपरसोनिक मिसाइल के सफल परीक्षण की बात कही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के मिसाइल के निर्माण से उत्तरी कोरिया की रक्षा शक्ति बहुत मज़बूत होगी।  इससे पहले मंगलवार को संचार माध्यमों ने दक्षिणी कोरिया की सेना के हवाले से बताया था कि उत्तरी कोरिया ने एक मिसाइल का परीक्षण किया है। सोमवार को संयुक्त राष्ट्रसंघ में उत्तरी कोरिया के प्रतिनिधि ने कहा था कि उनके देश को अपनी रक्षा शक्ति बढ़ाने का वैध अधिकार हासिल है। अमरीका और संयुक्त राष्ट्रसंघ की सुरक्षा परिषद ने सन 2006 में जब उत्तरी कोरिया ने पहली बार परमाणु परीक्षण किया था तो उसपर प्रतिबंध लगा दिया था।  उसके बाद भी पियुंगयांग पर समय-समय पर प्रतिबंध लगते रहे हैं। प्रतिबंधों के बावजूद उत्तरी कोरिया अपनी रक्षा क्षमता को बढ़ाता जा रहा है।  उत्तरी कोरिया का कहना है कि वह यह काम, अमरीका की ओर से संभावित ख़तरे से बचने के लिए कर रहा है। उत्तरी कोरिया ने यह बात खुलकर कह दी है कि जबतक अमरीका, पियु...

तालेबान ने अपनाया ज़ाहिर शाह का संविधान

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  तालेबान के गृहमंत्री ने कहा है कि हम अफ़ग़ानिस्तान में पूर्व शासक मुहम्मद ज़ाहिर शाह के काल के संविधान को लागू करेंगे। अफ़ग़ानिस्तान की समाचार एजेन्सी शफ़क़ना के अनुसार तालेबान के गृहमंत्री अब्दुल हकीम शरई ने काबुल में चीन के राजदूत से भेंट की।  इस भेंट में तालेबान के गृहमंत्री ने कहा कि हम अफ़ग़ानिस्तान में मुहम्मद ज़ाहिर शाह के काल के संविधान को लागू करेंगे। उन्होंने साथ ही इस बात पर विशेष बल दिया कि उस संविधान के जो नियम, इमारते इस्लामी से विरोधाभा रखते हैं उनको लागू नहीं किया जाएगा।  तालेबान के गृहमंत्री अब्दुल हकीम शरई ने कहा कि हम उन अन्तर्राष्ट्रीय क़ानूनों का सम्मान करते हैं जो तालेबान के नियमों के विरुद्ध न हों। ज्ञात रहे कि तालेबान ने जिस संविधान की बात कही है वह सन 1964 में अफ़ग़ानिस्तान में लागू हुआ था।  मुहम्मद ज़ाहिर शाह के काल के इस संविधान को अफ़ग़ानिस्तान के भूतपूर्व प्रधानमंत्री हामिद करज़ई के काल में भी अपनाया गया था। उल्लेखनीय है कि इससे पहले तक तालेबान एक नए संविधान की बात कर रहे थे।  उनके नए फैसले पर अफ़ग़ानिस्तान के भीतर से प्रतिक्रियाएं...

क्या अंग्रेज़ों के समय भारत के सारे राजा अय्याश और ख़राब शासक थे?

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  भारत में आज़ादी से पहले जो राजा-महाराजा थे उनकी छवि ऐसी है जिसमें हाथी-घोड़े, नर्तकियाँ, राजमहल की कल्पना तैरने लगती है. मगर क्या वो बस ऐसे ही थे? इतिहासकार मनु पिल्लई ने भारत के महाराजाओं के दौर का फिर से अवलोकन किया है. यदि आप गहनों से लदी उनकी तस्वीरों, महलों और भव्य दरबारों के परे देखेंगे, तो भारत के इन महाराजाओं के बारे में कुछ और भी बातें पता चल पाएंगी. आप ये पाएंगे कि उनका बहुत तिरस्कार किया गया, मज़ाक बनाया गया, और मज़ा लेने के इरादे से उनकी ज़िंदगी को एक कौतूहल की चीज़ बना दिया गया. अंग्रेजों ने अपने जमाने में "देशी" राजकुमारों को घोर पतनशील इंसानों के रूप में पेश किया, जिनका मन राज-काज से ज़्यादा सेक्स और फ़ैशन जैसी चीज़ों में रमता था. उदाहरण के लिए, एक गोरे अधिकारी ने महाराजाओं को "दैत्य जैसे, मोटे, दिखने में घिनौने" और किसी नाचने वाली की तरह "हार-कुंडल पहने" इंसानों के रूप में बताया. उसने कहा कि ये महाराजा गोरों जैसे नहीं बल्कि स्त्रियों की तरह दिखने वाले "बेवकूफ़" हैं.

बीते दौर की महिला निर्माता और कहानियां

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इस विषय पर अमृत गंगर टिप्पणी करते हैं, " जब कोई महिला किसी विषय पर फ़िल्म बनाती है, लिखती है, निर्देशन करती है या निर्माण करती है तो उसमें उस महिला का दृष्टिकोण आ ही जाता है, पर व्यक्तिगत तौर पर मुझे लगता है कि 1930 और 1940 के दशक के मुकाबले आज का दौर काफ़ी अलग है. आज का बॉलीवुड उस दौर के हिंदी फ़िल्म स्टूडियो के मुकाबले बेहद सामंती और लिंग भेद वाला नज़र आता है, साथ ही सांप्रदायिक मानसिकता भी है. वरना उस दौर में फ़ातिमा बेगम, ज़ुबैदा और जद्दनबाई जैसी महिलाएँ उभर कर नहीं आतीं.'' वो आगे कहते हैं," उन अभिनेत्रियों ने हर विषय में अपना हाथ आज़माया जिसमें सामाजिक, ऐतिहासिक, साहसी, बाग़ी, करतब दिखानेवाली और थ्रिलर फ़िल्में शामिल थीं. अगर ऐसा नहीं होता तो उस दौर की निडर नाडिया नहीं बनती." उस समय बनी 'बलिदान' फ़िल्म में माँ काली की जीव हत्या की निंदा की गई थी जिसमें ज़ुबैदा ने अभिनय किया था. 1960 के बाद  आया बदलाव हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर में कई अभिनेत्रियां निर्माता बन अनेक विषयों पर अपनी राय रखती रहीं. पर वक़्त के साथ उनकी संख्या में गिरावट आई. इतिहासकार अमृत...

अनुष्का और दीपिका जैसी सफल अभिनेत्रियां क्यों फ़िल्में बना रही हैं

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हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री पहले की तुलना में काफी बदल चुकी है. जिस तरह दर्शकों की मांग बदल रही है उसी तरह फ़िल्म निर्माण की प्रक्रिया में भी बदलाव हो रहे हैं. पुरुष प्रधान हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री अब फ़िल्मों में लिंग समानता की ओर झुक रही है. फ़िल्म अभिनेता शाहरुख़ ख़ान, सलमान ख़ान, आमिर ख़ान, अक्षय कुमार, अजय देवगन, रणबीर कपूर जैसे कलाकार फ़िल्म निर्माण का रुख़ कर फ़िल्म निर्माण में आगे आए हैं. लेकिन अब अभिनेत्रियां भी पीछे नहीं हैं. अपने अभिनय से फ़िल्म इंडस्ट्री में जगह बनाने वाली अनुष्का शर्मा ने भाई कर्नेश शर्मा के साथ मिलकर 'क्लीन स्लेट फ़िल्म्स' नामक प्रोडक्शन हाउस खोला है. इसके तहत उन्होंने NH10, परी, फ़िल्लौरी और बुलबुल जैसी फ़िल्में बनाई हैं. इंटरनेशनल स्टार बन चुकी प्रियंका चोपड़ा ने 'पर्पल पेबल्स पिक्चर्स' नामक प्रोडक्शन हाउस खोल कई हिंदी और क्षेत्रीय फ़िल्मों का निर्माण किया जिसमें शामिल है मराठी फ़िल्म वेंटीलेटर, नेपाली फ़िल्म पहुना और साल के शुरुआत में OTT पर रिलीज़ हुई फ़िल्म व्हाइट टाइगर. अपनी अदाकारी का लोहा मनवा चुकी दीपिका पादुकोण ने फ़िल्म निर्माण में ...

क्या है नान घोटाला

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नागरिक आपूर्ति निगम राज्य भर में लाखों परिवारों को राशन बांटने का काम करती रही है. राज्य की आर्थिक अपराध शाखा यानी ईओडब्ल्यू और भ्रष्टाचार निवारक ब्यूरो ने 12 फ़रवरी 2015 को नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के 28 ठिकानों पर एक साथ छापा मार कर करोड़ों रुपये बरामद किये थे. इसके अलावा इस मामले में कथित भ्रष्टाचार से संबंधित कई दस्तावेज़, हार्ड डिस्क और डायरी भी एंटी करप्शन ब्यूरो ने ज़ब्त की थी. आर्थिक अपराध शाखा ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में राइस मिलों से लाखों क्विंटल घटिया चावल लिया गया और इसके बदले करोड़ों रुपये की रिश्वतख़ोरी की गई. इसी तरह नागरिक आपूर्ति निगम के ट्रांसपोर्टेशन में भी भारी घोटाला किया गया. नमक की आपूर्ति में भी कथित भ्रष्टाचार किया गया. इस मामले में आरंभिक तौर पर 27 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया था. बाद में दो आईएएस अधिकारी, आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज किया गया. कथित घोटाले के दौरान दोनों अधिकारी क्रमश: नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध निदेशक और चेयरमैन थे. तब राज्य में विपक्षी दल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने आ...

हज़ारों करोड़ का 'नान घोटाला' फिर से चर्चा में, बढ़ेंगी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मुश्किलें?

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छत्तीसगढ़ में छत्तीस हज़ार करोड़ का कथित नागरिक आपूर्ति निगम यानी नान घोटाला फिर से चर्चा में आ गया है. विपक्ष में रहते हुए भूपेश बघेल ने नान घोटाला को एक बड़ा मुद्दा बनाया था. लेकिन अब भूपेश बघेल पर ही इस कथित घोटाले के मुख्य अभियुक्त आईएएस अफ़सरों को बचाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं. ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय ने छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकाल में हुए राशन घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर चल रही जाँच के बाद सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि इस घोटाले की जाँच के लिए भूपेश बघेल के आदेश पर बनाई गई स्पेशल टास्क फ़ोर्स के सदस्यों, मुख्यमंत्री और एक बड़े क़ानून अधिकारी ने, इस घोटाले में नाम आने वाले दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के ख़िलाफ़ कथित तौर पर मामले को कमज़ोर किया है. इस गंभीर आरोप के बाद विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने भूपेश बघेल की सरकार पर चौतरफ़ा हमला बोला है. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि भूपेश बघेल और कांग्रेस पार्टी, पत्र लिख कर जिस पीडीएस घोटाले की सीबीआई जाँच और अभियुक्त अधिकारियों को गिरफ़्तार करने की माँग करते थे, आज वही भूपेश बघेल उन्हें बचाने के लि...

ममता ख़ुद घर-घर घूम रही हैं

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  ममता बनर्जी लगातार इलाके में नुक्कड़ सभाएं करती रही हैं और घर-घर जाकर प्रचार करती रही हैं. चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने मस्जिदों और गुरुद्वारों के अलावा मंदिरों का भी दौरा किया है. उसके बाद बीजेपी को ममता के ख़िलाफ़ मुद्दा मिल गया है. बीजेपी की चुनाव समिति के सदस्य शिशिर बाजोरिया कहते हैं, "ममता बनर्जी को अब इस बात का एहसास हो गया है कि भबानीपुर सीट पर जीत की राह आसान नहीं है. यही वजह है कि उन्हें पहले दिन से ही पसीना बहाना पड़ रहा है." बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह सवाल करते हैं, "क्या आपने पहले किसी मुख्यमंत्री को उपचुनाव में जीत के लिए इतनी मेहनत करते देखा है?" बीजेपी ने चुनाव प्रचार के आख़िरी दिन सोमवार को इलाके में पूरी ताक़त झोंक दी. उसके कई नेताओं ने अलग-अलग वॉर्डों में घर-घर जाकर वोटरों से मुलाक़ात की और बीजेपी का समर्थन करने की अपील की. लेकिन टीएमसी नेता सौगत राय दलील देते हैं, "किसी भी उपचुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी का पलड़ा हमेशा भारी रहता है. लोग उसी का समर्थन करते हैं. जहां तक ममता के प्रचार की बात है वो हर चुनाव को युद्ध के तौर पर लेती हैं. उनके लिए ...

भवानीपुर उप-चुनाव: 'मिनी इंडिया' में मौसम और मतदाताओं का मिज़ाज बना ममता की चुनौती

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"भवानीपुर दीदी का गढ़ और घर है. यहां उनकी जीत में कोई संदेह नहीं है. मौसम विभाग ने मंगलवार और बुधवार को बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव के चलते कोलकाता में भारी बारिश की चेतावनी दी है. मौसम ठीक रहा तो मैं भी वोट देने जाऊंगा." कोलकाता के भवानीपुर इलाके में देर रात तक खुली रहने वाली चाय की मशहूर दुकान बलवंत सिंह इटरीज़ पर चाय पी रहे सोमेश्वर पाल की ये टिप्पणी ही इस अहम सीट पर हो रहे उप-चुनाव की पूरी तस्वीर बयान करती है. यहां 30 सितंबर को वोट डाले जाएंगे. और मौसम और मतदाताओं का यही मिज़ाज तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती भी है. यूं तो राज्य में तीन सीटों पर उप-चुनाव हो रहे हैं. उनमें से दो सीटें जंगीपुर और शमशेर गंज मुर्शिदाबाद ज़िले में हैं. लेकिन लोगों की निगाहें सिर्फ़ भवानीपुर सीट पर ही टिकी हैं. ममता बनर्जी के लिए यहां जीतना बहुत ज़रूरी है. लेकिन उन्हें या टीएमसी को अपनी जीत पर कोई संदेह नहीं है. उनकी असली चिंता मतदान के दिन वोटरों को घर से निकाल कर मतदान केंद्रों तक पहुंचाने की है ताकि जीत का अंतर अधिक से अधिक रह सके. इस सीट पर ...

भारत में ट्रेनिंग ले रहे अफ़ग़ान सैनिकों को मिलेगा छह महीने का वीज़ा

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  देश के विभिन्न सैन्य अकादमियों में प्रशिक्षण ले रहे 180 अफ़ग़ान सैनिकों और कैडेट को उनकी ट्रेनिंग पूरी होने के बाद छह महीने का ई-वीज़ा दिया जाएगा. हालांकि, इनमें से 140 अफ़ग़ान सैनिकों और कैडेट ने कनाडा, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे पश्चिमी देशों के लिए वीज़ा का आवेदन किया है. 'दैनिक जागरण' अख़बार लिखता है कि सूत्रों ने बताया है कि सरकार की तरफ से अफ़ग़ान सैनिकों और कैडेट को वीज़ा का प्रस्ताव दिया जाएगा. अब सैनिकों और कैडेट पर निर्भर करेगा कि वो अपने भविष्य को लेकर क्या फ़ैसला करते हैं. विदेश में शरण लेने वाले सैनिकों और कैडेट के अलावा कई ऐसे भी हैं जो भारत में ही रहना चाहते हैं और इसके लिए संबंधित एजेंसियों के संपर्क में हैं. अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के सत्ता पर कब्ज़ा जमाने के बाद इन सैनिकों और कैडेट का भविष्य अधर में लटक गया है.

दिल्ली सरकार ने स्कूलों में 'देशभक्ति' पाठ्यक्रम को किया शामिल

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दिल्ली सरकार ने मंगलवार को भगत सिंह की जयंती पर स्कूलों के लिए अपना 'देशभक्ति' पाठ्यक्रम जारी कर दिया. 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' अख़बार लिखता है कि इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य नर्सरी से 12वीं कक्षा के छात्रों में देशभक्ति की भावना को पोषित करना है. सरकार का कहना है कि वो इसको कक्षा की गतिविधियों और अपनी परिभाषा के दायरे में यह करना चाहती है. सभी छात्र क्लास और उसके बाहर होने वाली गतिविधियों के माध्यम से देशभक्ति के बारे में जान पाएंगे. 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए यह कक्षा सप्ताह में दो बार तो वहीं छठी से आठवीं कक्षा के छात्रों के लिए यह कक्षा रोज़ाना होगी. हर कक्षा 40 मिनट की होगी और इसका पाठ्यक्रम और शिक्षकों के लिए हैंडबुक मंगलवार को जारी कर दी गई. आर्थिक मामलों से जुड़े कुछ बदलाव जो आप पर डालेंगे असर एक अक्तूबर, 2021 से वित्तीय और बैंकिंग सेवा के कुछ नियमों में बदलाव होने जा रहे हैं. इन बदलावों को लेकर 'अमर उजाला' अख़बार ने एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसका सीधा असर आपके रोज़मर्रा के जीवन पर पड़ सकता है. अख़बार लिखता है कि एक अक्तूबर से 80 वर्ष या उसस...

नवजोत सिद्धू ने क्यों दिया इस्तीफ़ा और क्या ले सकते हैं इसे वापस - प्रेस रिव्यू

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  कांग्रेस नेतृत्व ने नवजोत सिंह सिद्धू का पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफ़ा मंज़ूर नहीं किया है और स्थानीय नेतृत्व से इम मामले को सुलझाने को कहा है. सिद्धू ने मंगलवार को ट्विटर पर इस्तीफ़े की घोषणा करके एक बार फिर यह दोहरा दिया कि पंजाब कांग्रेस में अभी भी सब कुछ ठीक नहीं हुआ है. अंग्रेज़ी अख़बार 'हिंदुस्तान टाइम्स' लिखता है कि सिद्धू अपने प्रधान सलाहकार मोहम्मद मुस्तफ़ा के साथ बीते दो दिनों से पंजाब में राजनीतिक बदलावों पर चर्चा कर रहे थे. उनके इस्तीफ़े ने सबको चौंका दिया है क्योंकि डीजीपी रैंक के पूर्व अधिकारी मुस्तफ़ा के साथ मैराथन बैठक करने के बाद उन्होंने सोमवार को अपना फ़ैसला ले लिया था. कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सिद्धू के इस्तीफ़ा पत्र को एक 'भावुक प्रतिक्रिया' बताते हुए कहा है कि सबकुछ ठीक हो जाएगा. कांग्रेस विधायक बावा हेनरी का कहना है कि सभी मुद्दों को सुलझा लिया जाएगा. उनका कहना है कि 3-4 मुद्दे हैं जिन पर पार्टी के स्तर पर चर्चाएं हुई हैं जिन्हें पार्टी हाई कमान सुलझा लेगा. क्यों दिया सिद्धू ने इस्तीफ़ा दूसरी ओर एक अन्य अंग्रेज़ी अख़बार ...

कहां से मोती बनाने की मिली प्रेरणा

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  इलाहाबाद स्टेशन पर एएच व्हीलर की दुकान पर संयोग से उन्हें नेशनल ज्योग्राफ़िक का पुराना अंक मिल गया, जो कल्चर मोती निर्माण के बारे में जानकारी पर आधारित विशेषांक था. सोनकर ने उसे ना केवल ख़रीदा बल्कि आज तक संभाल कर रखा है. इन सबके साथ अपने तालाब के सीपों के साथ उन्होंने अपनी समझ से प्रयोग करना शुरू कर दिया. सीपों को पकड़ कर बड़े-बड़े बर्तनों में रखना और उसे टकटकी लगाए देखना, सोनकर का शगल बन गया था. मिडिल क्लास समाज में यह काम इतना भी आसान नहीं था. जल्दी ही उन्हें पता चल गया कि ये सीप सांस लेने के लिए मुंह खोलते हैं और ये भी मालूम था कि कोई बाहरी चीज़ के अंदर जाने पर वह मोती बन सकता है. उन्होंने बताया, "जब मैंने पढ़ना शुरू किया तो मुझे पता चला कि दुनिया भर में मोती उगाने वाली तकनीक केवल जापान के पास थी, वे दूसरे देशों को बताते नहीं थे. और बेहतर मोती बनाने के लिए जो रॉ मैटेरियल यानी न्यूक्लियस इंजेक्ट करना पड़ता है वो अमेरिका के मिसीसिपी नदी में मिलता है. लेकिन अमेरिका में तकनीक नहीं थी. तो मोती बनाना है तो जापान से मदद लेनी होती थी." लेकिन शुरुआती दिनों में सीप के मुंह खोलने ...

प्रयागराज से दुनिया को चौंकाने वाले सोनकर

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  डॉक्टर अजय सोनकर का नया काम भले अचंभे में डालने वाला हो, लेकिन मोती उगाने की दुनिया में बीते तीन दशक में वे इसी तरह के नये नये कामों से दुनिया को चौंकाते आए हैं. मोती बनाने को लेकर उनकी दिलचस्पी इलाहाबाद के कटरा में 1991 में शुरू हुई थी. भौतिकी, रसायन और गणित पढ़ने वाले सोनकर इंजीनियर बनना चाहते थे और वारंगल रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज से उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी पूरी की. लेकिन उन्हीं दिनों दूरदर्शन पर दोपहर में आने वाले यूजीसी के शैक्षणिक कार्यक्रम पर आधारित टीवी शो के एक एपिसोड में प्रसारित एक स्टोरी ने उनके जीवन को बदल दिया. उस एपिसोड के बारे में सोनकर बताते हैं, "उस स्टोरी में जापानी पर्ल कल्चर के बारे में बता रहे थे, जब मैंने सीप में से उन लोगों को मोती निकालते देखा तो फिर तो मेरी दिलचस्पी उसमें हो गई. इसकी वजह ये थी कि हमारे पास एक तालाब था और उसमें सीप थे. तो आप कह सकते हैं कि मेरे दिमाग़ में ये धंस गया कि मैं भी मोती बना सकता हूं, हालांकि मुझे तकनीक के बारे में कुछ भी मालूम नहीं था और इंटरनेट का तब जन्म ही हुआ था और भारत में वह मौजूद नहीं था." डॉक्टर अजय कुमार स...

आतंकी संगठन दाइश से अमरीका और नैटो के सहयोग के ठोस दस्तावेज़ों का मुद्दा,

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रूसी विदेश मंत्रालय का कहना है कि उसके पास उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान में दाइश और अमरीका के सहयोग के ठोस दस्तावेज़ मौजूद हैं।. ....रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ज़ाख़ारोवा का कहना है कि हम कई बार दाइश के साथ अमरीका और नैटो के सहयोग के डोज़ियर पेश कर चुके हैं और यह दूसरों की ओर से सुरक्षा परिषद में पेश किए जाने वाले झूठे साक्ष्यों की तरह नहीं हैं।.....रूसी अधिकारी इससे पहले भी उत्तरी अफ़गानिस्तान में अमरीकियों के ज़रिए दाइशी आतंकियों के एक स्थान से दूसरी जगह स्थानान्तरण और अमरीकी हेलीकाप्टरों की संदिग्ध उड़ानों की बात कह चुके हैं।....यह कम से कम पांच साल पहले की बात है।....अफ़ग़ानिस्तान के वरिष्ठ टीकाकार उस समय यह मुद्दा उठा चुके हैं लेकिन बाद में काबुल में उनकी हत्या कर दी गई और हत्यारों का कुछ पता नहीं चला। ...अफ़ग़ान टीकाकार ने कहा था कि तालेबान के नियंत्रण वाले इलाक़ों में अमरीकी हेलीकाप्टरों के उतरने के मामले में यह तय है कि अमरीकियों को पूरी तरह इस मामले की जानकारी है। अमरीकियों को इस बारे में जवाब देना चाहिए अलबत्ता वह जवाब देने के लिए तैयार नहीं हैं।...उत्तरी अफ़गानिस्तान में दाइश क...

इमाम हुसैन का चेहलुम और अफ़ग़ानिस्तान के हालात, राजधानी काबुल में गूंजा या हुसैन का नारा, पूरे देश में मजलिस-मातम

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......हर साल दसियों हज़ार अफ़ग़ान नागरिक अरबईन के अवसर पर इराक़ में होने वाले पैदल मार्च में हिस्स् लेते थे लेकिन इस साल देश में हालिया महीनों के हालात की वजह से सीमाएं बंद होने के नतीजे में लोगों को इसका मौक़ा नहीं मिल सका। .....अफ़गान युवा का कहना है कि मैं इस साल अरबईन पर पैदल मार्च में शामिल होना चाहता था क्योंकि इमाम हुसैन की ज़ियारत के लए उठने वाले हर क़दम के बदले एक नेकी इंसान के कर्मपत्र में लिखी जाती है। ....इस युवा का कहना है कि हर शीया की आरज़ू होती है कि इस दुनिया से रुख़सत होने से पहले इमाम हुसैन की पैदल ज़ियारत का कम से कम एक मौक़ा मिल जाए। आज चेहलुम के अवसर पर अफ़ग़ानिस्तान की मस्जिदों और इमाम बारगाहों में हुसैनी आशिकों का मजमा था।.... अफ़ग़ान बुज़ुर्ग का कहना है कि इस साल हमारे अफ़ग़ान समाज को अनेक कठिनाइयों का सामना है लेकिन अगर मुहर्रम और सफ़र की शोक सभाओं और अज़ादारी की बात की जाए तो बहुत अच्छे ढंग से हुई। आज ख़ुद महसूस कर सकते हैं कि इस पवित्र स्थल पर बहुत अच्छे अंदाज़ में इमाम हुसैन की अज़ादारी का कार्यक्रम हुआ।.....इमाम हुसैन की अज़ादारी में नौहा और मातम का ख़ास स...

कोका-कोला ने सिर्फ़ 10 मिनट में एक 22 वर्षीय बदक़िस्मत युवक की जान ले ली

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सॉफ़्ट ड्रिंक कोका-कोला ने एक बदक़िस्मत चीनी युवक की सिर्फ़ 10 मिनट में जान ले ली। गर्मी से बेहाल 22 वर्षीय चीनी युवक ने 1.5 लीटर की कोका कोला की बोतल जैसे ही पी, उसके कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों का कहना है कि सॉफ़्ट ड्रिंक के तेज़ी से सेवन से युवक के शरीर के अंदर कई गैसों का दबाव बढ़ गया, जिससे लीवर तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाया और नतीजे में उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने इस बदक़िस्मत युवक की पहचान ज़ाहिर नहीं की है। प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, कोका कोला पीने के बाद युवक को तेज़ दर्द का अहसास हुआ, जिसके  बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। बीजिंग स्थित चाओयांग अस्पताल के डॉक्टरों को युवक ने बताया कि उसने गर्मी के कारण कोका-कोला की 1.5 लीटर की बोतल तेज़ी से पी ली थी। तेज़ी से सॉफ़्ट ड्रिंक पीने से युवक की आंतों में गैस बन गई और उच्च दबाव के कारण, सॉफ़्ट ड्रिंक्स की गैस उसके जिगर की मुख्य धमनियों में से एक में लीक हो गई। स्कैन से पता चला कि उसे हेपेटिक इस्किमिया हो गया, जिसे लिवर शॉक भी कहा जाता है। यह समस्या शरीर के अंगों में ऑक्सीजन की कमी के कारण उत्पन्न होती है। 

इस महान हस्ती की किताबें और अन्य रचनाएं आत्मज्ञानियों के लिए लाभदायक स्रोत थीं और रहेंगी सुप्रीम लीडर

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ईरान में महान विद्वान हसनज़ादा आमुली के निधन पर सर्वोच्च नेता ने शोक संदेश जारी करते हुए संवेदना जताई। वरिष्ठ नेता ने अपने संदेश में लिखा कि एकेश्वरवाद के राही और धर्म व ज्ञान की गहरी समझ रखने वाले विद्वान आयतुल्लाह हसन ज़ादा आमुली के निधन की दुखद ख़बर मिली। वरिष्ठ नेता ने अपने संदेश में लिखा कि यह विद्वान धर्मगुरू, विभिन्न कलाओं में माहिर और उन गिनी चुनी गौरवशाली व बेजोड़ हस्तियों में थे जो अपने वुजूद से अपने दौर के आत्मज्ञानियों के दिलों की ठंडक बने रहते थे और हमेशा उनके ज्ञान, आत्मज्ञान और तर्क की प्यास को बुझाते थे। सर्वोच्च नेता ने आगे लिखा कि इस महान हस्ती की किताबें और अन्य रचनाएं आत्मज्ञानियों के लिए लाभदायक स्रोत थीं और रहेंगी आयतुल्लाह हसनज़ादा आमुली का शनिवार को 93 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने फ़िक़ह, दर्शनशास्त्र, नैतिकशास्त्र, गणित, खगोल शास्त्र, अरबी व फ़ार्सी साहित्य, प्राचीन तिब, तफ़सीरे क़ुरआन और अनेक इस्लामी विषयों पर दर्जनों किताबें लिखी हैं। शनिवार को उन्हें तबीयत ख़राब होने पर उत्तरी ईरान के आमुल शहर में इमाम रज़ा अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां रात को उन...

वेस्ट बैंक का इलाक़ा भी इस्राईल के लिए अशांत हो गया, हमास के अधिकारी ने दिया था बड़ा बयान, अगली जंग वेस्ट बैंक में होगी

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वेस्ट बैंक के इलाक़े में पांच फ़िलिस्तीनियों की इस्राईली सैनिकों की फ़ायरिंग में शहादत के बाद, बीता के इलाक़ में स्थित इस्राईली चेक पोस्ट पर फ़िलिस्तीनियों और इस्राईली सैनिकों के बीच भीषण झड़पें हुईं झड़पों के दौरान इस्राईली सेना की बहुत सी बक्तरबंद गाड़ियों ने रामल्लाह शहर पर हमला किया जिसके दौरान आंसू गैस के व्यापक इस्तेमाल की वजह से दसियों लोगों को दम घुटने की शिकायत हुई। एक फ़िलिस्तीनी नागरिक का कहना है कि अब समय आ गया है कि हमारी जनता प्रतिरोध और आज़ादी के ध्वज के नीचे एकजुट हो जाएं, बैतुल मुक़द्दस के शहीदों पर सलाम, शहीदों पर सलाम, सलाम हो बीता और जेनीन के शहीदों पर, यह ख़ून तलवार पर विजयी होगा, हम प्रतिरोध के ध्वज के नीचे एकजुट हो चुके हैं। कल रामल्लाह शहर में कई प्रदर्शन आयोजित हुए जिसके दौरान प्रदर्शनकारियों ने विश्व समुदाय से मांग की है कि वह इस्राईल के आतंकवाद को रोकने के लिए हस्तक्षेप करें और प्रतिरोध से मांग की है कि वह इस्राईल के अपराधों का मुंहतोड़ जवाब दे। एक अन्य फ़िलिस्तीनी नागरिक का कहना है कि हम बल देते हैं कि यह हमले, प्रतिरोध के हौसलों को तोड़ नहीं सकते, बल्कि इसस...

सीरिया में अरबईन, इमाम हुसैन की नन्हीं बेटी के मज़ार पर एकत्रित हुए ज़ायरीन

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.अरबईन की पूर्व संध्या पर इमाम हुसैन की तीन साल की बेटी का रौज़ा श्रद्धालुओं का जमघट बना हुआ है.....युवा श्रद्धालु का कहना है कि हम इमाम हुसैन के चाहने वाले हैं और अपनी गरिमा और गौरव की बुनियाद यही समझते हैं कि इमाम हुसैन के रास्ते पर चलते रहें....इस साल जो श्रद्धालु चेहलुम के अवसर पर कर्बला नहीं पहुंच सके हैं वह इमाम हुसैन की बेटी के रौज़े पर पहुंच कर श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे हैं। .....महिला श्रद्धालु का कहना है कि अरबईन के मौक़े की ज़ियारत इमाम हुसैन से वफ़ादारी और कर्बला की महानता की प्रतीक है......श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर इमाम हुसैन और उनके साथियों की कर्बला के मरुस्थल में नज़र आने वाली मज़लूमियत को याद किया नौहे पढ़े गए मातम किया गया .....ईरान से पहुंचे श्रद्धालु का कहना है कि हम अपने शहीदों को भी याद कर रहे हैं, महान शहीद जनरल सुलैमानी को याद कर रहे हैं जिनका नाम हमेशा बुलंदियों पर रहेगा।....युवा श्रद्धालु का कहना है कि हम अपनी जान दे देंगे लेकिन इस परचम को झुकने नहीं देंगे, अरबईन के इस वैभव को कम नहीं होने देंगे। जब तक हमारी रगों में ख़ून है चेहलुम इसी तरह मनाया जाता रहेगा। इ...

अरबईन के अवसर पर दुनिया भर के करोड़ों मुसलमानों की इमाम हुसैन (अ) को श्रद्धांजलि, लाखों ज़ायरीन कर्बला पहुंचे

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दुनिया भर के शिया मुसलमान इस्लामी कैलंडर के मुताबिक़, 10 मोहर्रम सन् 61 हिजरी क़मरी को कर्बला में अपने 72 साथियों के साथ शहीद होने वाले इमाम हुसैन (अ) का अरबईन या चालीसवां मना रहे हैं। इस अवसर पर ईरान में सोमवार को कोरोना प्रोटोकॉल के तहत शोक सभाओं और मामती जुलूसों का आयोजन किया जा रहा है, तो वहीं इराक़ और भारत समेत कुछ देशों में मंगलवार को अरबईन मनाया जाएगा। हर साल दुनिया भर के करोड़ों मुसलमान अरबईन के अवसर पर अपने शहीद इमाम को श्रद्धांजलि देने के लिए इराक़ की यात्रा करते हैं और पवित्र शहर नजफ़ से कर्बला तक की 80 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करते हैं। हालांकि दुनिया भर में कोरोना महामारी के प्रकोप के चलते पिछले दो वर्षों से इतनी बड़ी संख्या में ज़ायरीन इराक़ नहीं पहुंच सके हैं, जबकि इस साल इराक़ी सरकार ने एक सीमित संख्या में विदेशी ज़ायरीन को अरबईन के अवसर पर वीज़ा जारी किए हैं। बग़दाद सरकार ने इस साल 60,000 ईरानी ज़ायरीन को वीज़ा जारी किए हैं। प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, सोमवार तक 59,000 ईरानी ज़ायरीन इराक़ पहुंच चुके थे।

फ़िलिस्तीनी संगठनों ने दी बड़ी चेतावनी कहा ख़ामियाज़ा भुगतने के लिए तैयार रहे इस्राईल

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फ़िलिस्तीनी चिकित्सा सूत्रों का कहना है कि वेस्ट बैंक के रामल्ला और जेनिन इलाक़ों में रविवार को इस्राईली हमलों में कम से कम पांच फ़िलिस्तीनी शहीद हो गए। रामल्ला के दक्षिण पश्चिम में बदू और बैत अन्नान गावों में इस्राईलियों ने तीनि फ़िलिस्तीनियों की हत्या कर दी जबकि जेनिन के दक्षिण में स्थित बरक़ीन गांव में इस्राईली हमलों में दो फ़िलिस्तीनी शहीद हो गए। इस्राईली सूत्रों का कहना है कि झड़पों में एक इस्राईली कमांडर और एक सैनिक घायल हो गए हैं। इस बीच फ़िलिस्तीनी संगठन हमास ने कहा है कि शहीदों का ख़ून व्यर्थ नहीं जाएगा हम अपना प्रतिरोध तेज़ कर रहे हैं। जेहादे इस्लामी संगठन ने कहा कि काले दिन इस्राईल के इंतेज़ार में हैं। जेहादे इस्लामी के कमांडर दाऊद शहाब ने पांच फ़िलिस्तीनियों की शहादत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शहीदों का पाकीज़ा ख़ून व्यर्थ नहीं जाएगा, इस्राईल को अपने आतंकवाद का ख़मियाज़ा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ज़ायोनी शासन की इन हरकतों से हमारी प्रतिरोध की ताक़त और भी बढ़ेगी। फ़िलिस्तीन लिब्रेशन डेमोक्रेटिक फ़्रंट ने एक बयान में कहा कि जिन लक्ष्यों के लिए यह फ़िलिस्तीनी युवा शही...

असम में मुस्लिम नागरिकों की हत्या और उनके साथ दरिंदगी के मामले में मुख्यमंत्री पर भारी दबाव, पाकिस्तान ने उठाया यह मुद्दा

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भारत के असम राज्य में पुलिस के हाथों मुस्लिम प्रदर्शनकारियों की हत्या और लाश पर फ़ोटो जर्नलिस्ट के कूदने का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है, यहां तक कि मुख्यमंत्री पर अपने छोटे भाई के ख़िलाफ़ कार्यवाही का दबाव बढ़ गया है वहीं यह मामला पाकिस्तान ने भी उठाया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर दरंग हिंसा को लेकर अपने छोटे भाई के ख़िलाफ़ कार्यवाही करने के लिए दबाव है। दरंग ज़िले की पुलिस, धौलपुर नामक गांव में कथित अवैध अतिक्रमण हटाने गई थी, लेकिन पुलिस और अतिक्रमणकारियों के बीच हिंसा होने की वजह से दो लोगों की जान चली गई।  दरंग ज़िले में एसपी सुशांत सिंह बिस्वा सरमा हैं जो असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के छोटे भाई हैं। इस घटना के बाद कांग्रेस समेत कई अन्य पक्ष सरकार पर स्थानीय पुलिस अधीक्षक यानी सुशांत बिस्वा सरमा के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। असम सरकार ने 23 सितंबर की घटना की जांच गुवाहाटी हाई कोर्ट के एक पूर्व जज से कराने के आदेश जारी किए हैं। कांग्रेस से लेकर ऑल असम माइनॉरिटीज़ स्टूडेंट्स यूनियन इस घटना की जांच को लेकर सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन से संतुष्...