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जनवरी, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बजट, रोज़गार और क्रिप्टोकरेंसी

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क्या बसपा को ब्राह्मणों का समर्थन मिलेगा?

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प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद दिल्ली यूनिवर्सिटी में हिंदी विभाग में कार्यरत हैं और एक जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक और स्तंभकार हैं. उनके मुताबिक़ 2007 के समीकरण को दोहराना बहुजन समाज पार्टी के लिए मुश्किल होगा. वो कहते हैं, "ब्राह्मणों को अगर आप वर्णवादी दृष्टि से देखें तो भारतीय जनता पार्टी के रूप में उन्हें एक विचारधारात्मक पार्टी मिली है जिसे आसानी से छोड़ना उनके लिए संभव नहीं होगा." प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद कहते हैं, ''ये कहा जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने से जो राजपूतों और ब्राह्मणों में एक प्रतिद्वंद्विता उभरी है उससे ब्राह्मण शायद अपनी वफ़ादारी बदल लेंगे. लेकिन अगर वे बदलेंगे भी तो वे ऐसे दल की तरफ़ जाएंगे जिससे सत्ता में उनकी भागीदारी और बन सके और वो मोल-तोल करने की ताक़त रख सकें. अभी के माहौल में बहुजन समाज पार्टी का जो जनाधार है वो किसी भी दूसरे जातीय समूह को विश्वास नहीं दिलाएगा कि वो सत्ता में आ पाएगा. इसलिए मुझे नहीं लगता कि ये समीकरण दोहराया जा सकेगा." प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद के मुताबिक़ अगर बसपा की चुनाव जीतने की सारी अपेक्षा और रणनीति ब्राह्मणों ...

उत्तर प्रदेश चुनाव: 2007 की यादें और सोशल इंजीनियरिंग के दम पर बसपा की छुपा रुस्तम साबित होने की उम्मीद कितनी कारगर होगी?

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पिछले साल 9 अक्टूबर को पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर बहुजन समाज पार्टी ने लखनऊ में एक बड़ी जन सभा की. इस सभा में भाषण देते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी से दुखी रही है और अब बसपा के शासन काल को याद कर रही है. साथ ही मायावती ने दावा किया कि जनता सत्ता परिवर्तन के लिए अपना मन बना चुकी है और इस बार उनकी पार्टी की सरकार बनना तय है. इस जनसभा के बाद कई हफ़्तों तक मायावती किसी बड़े चुनावी आयोजन में नज़र नहीं आईं और ये चर्चा ज़ोर पकड़ने लगी कि मायावती चुनाव प्रचार से नदारद क्यों हैं? कुछ दिन पहले जब बीबीसी की टीम लखनऊ में बसपा के मुख्यालय पहुंची तो वहां सन्नाटा पसरा था. तीन चार पार्टी कर्मचारियों के सिवा वहां कोई नहीं था. पार्टी मुख्यालय को देख कर ये कहना मुश्किल था कि ये एक ऐसी राजनीतिक पार्टी का दफ्तर है जो उत्तर प्रदेश में अगली सरकार बनाने का दावा कर रही है. लेकिन बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा का ये कहना था कि ज़मीनी स्तर पर उनकी पार्टी का चुनाव प्रचार उसके प्रतिद्वंद्वियों से मीलों आगे है...

कंपनी का फ़ेसबुक से विवाद

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मई 2020 में आई एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि एनएसओ ग्रुप ने यूज़र्स के फ़ोन में हैकिंग सॉफ्टवेयर डालने के लिए फ़ेसबुक की तरह दिखने वाली वेबसाइट का प्रयोग किया. समाचार वेबसाइट मदरबोर्ड की एक जांच में दावा किया गया है कि एनएसओ ने पेगासस हैकिंग टूल को फैलाने के लिए एक फेसबुक के मिलता जुलता डोमेन बनाया. वेबसाइट ने दावा किया कि इस काम के लिए अमेरिका में मौजूद सर्वरों का इस्तेमाल किया गया. बाद में फ़ेसबुक ने बताया कि उन्होंने इस डोमेन पर अधिकार हासिल किया ताकि इस स्पाइवेयर को फैसले से रोका जा सके. हालांकि एनएसओ ने आरोपों से इनकार करते हुए उन्हें "मनगढ़ंत" करार दिया था. इसराइली फर्म इससे पहले से ही फेसबुक के साथ कानूनी लड़ाई में उलझा हुआ है. 2019 में फेसबुक ने आरोप लगाया था कि एनएसओ ने जानबूझकर व्हाट्सएप पर अपने सॉफ्टवेयर को फैलाया ताकि लोगों के फ़ोन की सिक्युरिटी से समझौता किया जाए. फ़ेसबुक के मुताबिक जिनके फ़ोन हैक हुए उनमें पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल थे. सऊदी सरकार को बेचा सॉफ्टवेयर? कंपनी पर सऊदी सरकार को सॉफ्टवेयर देने का भी आरोप है, जिसका कथित तौर पर पत्रकार जमा...

पेगासस फिर सुर्ख़ियों में, इसराइल का ये स्पाईवेयर कैसे काम करता है

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भारत में पेगासस स्पाईवेयर एक बार फिर चर्चा में है. संसद के बजट सत्र के ऐन पहले इसे लेकर अमेरिकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक नई रिपोर्ट छापी है जिसे लेकर विपक्ष ने मोदी सरकार पर हमला शुरू कर दिया है. इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मोदी सरकार ने जुलाई 2017 में इसराइली समूह एनएसओ से पेगासस जासूसी सॉफ़्टवेयर ख़रीदा था. सरकार की ओर से अभी इस रिपोर्ट पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है मगर पिछले वर्ष सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव को इस मामले पर संसद में सफ़ाई देनी पड़ी थी जिसमें उन्होंने सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों को सीधे-सीधे ख़ारिज कर दिया था. अब न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के बाद लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को अश्विनी वैष्णव के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने का नोटिस देते हुए लिखा है कि आईटी मंत्री ने पेगासस जासूसी मामले में संसद को गुमराह किया था. आइए समझते हैं कि पेगासस क्या है जिसे लेकर दावा किया गया था कि इससे भारत में कई पत्रकारों और चर्चित हस्तियों के फ़ोन की जासूसी की गई. पेगासस को इसराइल की साइबर सुरक्षा कंपनी एन...

बजट में क्या-क्या शामिल होता है?

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सरकार का आम बजट मूल रूप से उसके खर्चे और राजस्व (रेवेन्यू) का ब्योरा होता है. सरकार के खर्च में जनकल्याण योजनाओं में दिया जाने वाला फंड, आयात के खर्चे, सेना की फंडिंग, वेतन और कर्ज पर दिया जाने वाला ब्याज वगैरह शामिल होता है. जबकि सरकार टैक्स लगाने के साथ ही, सार्वजनिक क्षेत्र के कारोबारों से कमाई और बॉन्ड जारी कर राजस्व इकट्ठा करती है. इस बजट के दो हिस्से होते हैं- रेवेन्यू बजट और कैपिटल बजट. रेवेन्यू बजट में ही खर्च और राजस्व का ब्योरा होता है. रेवेन्यू प्राप्ति में टैक्स और गैर टैक्स स्रोत से हासिल रकम दिखाई जाती है. रेवेन्यू खर्च सरकार के हर दिन के कामकाज और नागरिकों को दी जाने वाली सेवाओं में लगा खर्च होता है. अगर रेवेन्यू खर्च रेवेन्यू प्राप्ति से ज्यादा होता है तो सरकार को राजस्व का घाटा होता है. कैपिटल बजट या पूंजी बजट सरकार की प्राप्तियों और उसकी ओर से किए गए भुगतान का ब्योरा होता है. इसमें जनता से लिया गया लोन ( बॉन्ड के जरिये), विदेश से और आरबीआई से लिया गया लोन शामिल होता है. वहीं पूंजीगत खर्च में मशीनरी, औजार, बिल्डिंग, हेल्थ सुविधा, शिक्षा पर किया गया खर्च शामिल होता है. ...

बजट 2022: भारत का आम बजट कैसे तैयार होता है, जानिए इससे जुड़ी दिलचस्प जानकारियां

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भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2022 को आम बजट पेश करेंगी. आम बजट सुबह 11 बजे पेश होगा. निर्मला सीतारमण चौथी बार बजट पेश करेंगी. इससे पहले 31 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाएगा. आइए जानते हैं कैसे तैयार होता है बजट और क्या है इससे जुड़ी दिलचस्प जानकारियां. आम या भारत का संघीय बजट क्या है? भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के मुताबिक किसी एक खास साल में केंद्र सरकार के वित्तीय ब्योरे को संघीय बजट कहते हैं. संविधान के मुताबिक सरकार को हर वित्त वर्ष की शुरुआत में संसद में बजट पेश करना होता है. वित्त वर्ष की अवधि मौजूदा वर्ष के 1 अप्रैल से अगले साल के 31 मार्च तक होती है. सरकार की ओर पेश वित्तीय ब्योरे में किसी खास वित्त वर्ष में केंद्र सरकार की अनुमानित प्राप्तियों (राजस्व और अन्य प्राप्तियां) और खर्चे को दिखाया जाता है. सरल शब्दों में कहा जाए तो बजट अगले वित्त वर्ष के लिए सरकार की वित्तीय योजना है. दरअसल इसके जरिये यह तय करने की कोशिश की जाती है सरकार अपने राजस्व की तुलना में खर्चे को किस हद तक बढ़ा सकती है. बजट की नींव कैसे रखी जाती है? देश में किसी साल उत्पादित वस्तुओं...

ख़ैबर पख़्तूनख्वा सूबे में गांधी की दूसरी छवि

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वहीं पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत के बारे में कहा जा सकता है कि वहां हमेशा गांधी जी के हक़ में माहौल  रहा. इसकी संभवत: यह वजह रही कि वह 'सरहदी गांधी' ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान का सूबा रहा है. गांधी और सरहदी गांधी दोनों घनिष्ठ मित्र और सहयोगी थे. गांधी जी ने सरहदी गांधी के साथ 1938 में इस सूबे का दौरा भी किया था. वे पेशावर, बन्नू और मरदान भी गए थे. बताते चलें कि राजधानी दिल्ली से सटे औद्योगिक शहर फ़रीदाबाद में बन्नू के लोगों को बसाया गया था. इसलिए सरहदी गांधी 1969 में फ़रीदाबाद में अपने लोगों से मिलने गए थे. बहरहाल, गांधी जी का सरहदी गांधी के सूबे ने तहेदिल से स्वागत किया था. देश के बंटवारे के बाद वहां पर गांधी और सरहदी गांधी के मूल्यों पर चलने वाली अवामी नेशनल पार्टी (एएनपी) सबसे बड़ी और शक्तिशाली सियासी जमात रही. सीमांत गांधी के पुत्र ख़ान अब्दुल वली ख़ान ने इस पार्टी की स्थापना की थी. वे भी गांधी जी से बार-बार मिले थे. अपने दादा और पिता की तरह इसके मौजूदा नेता अफ़संदयार वली ख़ान भी भारत के मित्र हैं. अफ़संदयार के दादा और पिता ने देश के बंटवारे का कड़ा विरोध किया था...

महात्मा गांधी को पाकिस्तान कितना जानता-समझता है

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पाकिस्तान में महात्मा गांधी की मूर्तियां दो जगहों पर हैं. पहली, इस्लामाबाद के पाकिस्तान संग्रहालय में और दूसरी, इस्लामाबाद में ही भारत के उच्चायोग में. पाकिस्तान संग्रहालय में निश्चित रूप से उनकी मूर्ति कोई सम्मान के भाव से नहीं लगाई गई है. वहां लगी प्रतिमा में वे मोहम्मद अली जिन्ना से बात कर रहे हैं. दरअसल, सितंबर 1944 में इन दोनों नेताओं के बीच भारत की आज़ादी को लेकर मुंबई (तब बम्बई) में कई दौर की बातचीत हुई थी. संग्रहालय में रखी यह मूरत उसी घटना को दिखाती है. महात्मा गांधी की यदि 30 जनवरी, 1948 को हत्या न हुई होती तो कुछ दिनों बाद वे पाकिस्तान जाने वाले थे. वे लाहौर, रावलपिंडी और कराची जाने की ख़्वाहिश रखते थे. गांधी जी पाकिस्तान की यात्रा इसलिए करना चाहते थे क्योंकि दोनों देशों में बंटवारे के बाद हुई भयंकर हिंसा के बाद सौहा​र्द का वातावरण बने. गांधी जी ने कहा भी था, "मैं लाहौर जाना चाहता हूं. मुझे वहां जाने के लिए किसी तरह की सुरक्षा की ज़रूरत नहीं है. मुझे मुसलमानों पर भरोसा है. वे चाहें तो मुझे मार सकते हैं? पर (पाकिस्तान) सरकार मेरे आने पर रोक कैसे लगा सकती है. अगर वह मुझे ...

डिफेंस सिस्टम कहीं से भी ख़रीदो, हो तुम हमारी गिरफ़्त में, यूएई को अलहूसी का संदेश

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मुहम्मद अली अलहूसी ने कहा है कि यूएई द्वारा डिफेंस सिस्टम ख़रीदने का फैसला बताता है कि हमारे मिसाइलों को निष्क्रय करने का उनका दावा झूठा था। यमन के अंसारुल्लाह आन्दोलन की उच्च परिषद के वरिष्ठ सदस्य मुहम्मद अली अहूसी ने कहा है कि संयुक्त अरब इमारात, नया डिफेंस सिस्टम ख़रीदने जा रहा है। उन्होंने ट्वीट किया कि यूएई का यह फैसला बताता है कि सऊदी अरब और उसके एंटी एयरक्राफ्ट, यमनियों के मिसाइल और ड्रोन को नष्ट कर पाने में विफल रहे। इससे पहले यमन की सेना के प्रवक्ता यहया सरी ने कहा था कि यमन की ओर से किये गए हमले में हमारे कई मिसाइल अबूधाबी में अपने लक्ष्य तक पहुंचे थे और इसी प्रकार से दुबई में भी हमारे ड्रोन ने अपने लक्ष्यों को भेदा था। ज्ञात रहे कि संयुक्त अरब इमारात ने दावा किया है कि उनके देश की एंटी एयरक्राफ्ट्स ने यमनियों की ओर से फायर किये गए मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर दिया था जबकि यमन की सेना का कहना था कि उनके मिसाइल और ड्रोन हमलें कामयाब रहे।

न जाने क्यों आग से खेल रहा है उत्तरी कोरियाः अमरीका

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अमरीका ने उत्तरी कोरिया के हालिया परीक्षणों को बहुत ही ख़तरनाक बताया है। उत्तरी कोरिया द्वारा हालिया मिसाइल का परीक्षण करने के बाद वाशिग्टन और टोकियो ने इसे पूरे विश्व के लिए ख़तरा बताया है। स्पूतनिक समाचार एजेन्सी के अनुसार जापान के विदेशमंत्रालय ने बयान जारी करके बताया है कि उत्तरी कोरिया द्वारा हालिया दिनों में किये गए मिसाइल परीक्षणों के संदर्भ में जापान और अमरीका के विदेशमंत्रियों ने विचार-विमर्श किया है।  दोनो पक्षों ने उत्तरी कोरिया के मिसाइल परीक्षणों को विश्व विशेषकर कोरिया प्रायःद्वीप और जापान के लिए गंभीर ख़तरा बताया है। इस बयान के अनुसार जापान, अमरीका और दक्षिणी कोरिया के बीच निकट सहयोग करके उत्तरी कोरिया के निशस्त्रीकरण पर सहमति बनी है। इसी बीच कूटनैतिक सूत्रों का कहना है कि उत्तरी कोरिया द्वारा किये गए हालिया परीक्षणों के दृष्टिगत अमरीका ने राष्ट्रसंघ की सुरक्षा परिषद से इस बारे में आपातकाली बैठक आहूत करने की मांग की है जो संभवतः गुरूवार को आयोजित होगी। दूसरी ओर दक्षिणी कोरिया ने दावा किया है कि इस बात की प्रबल संभावना पाई जाती है कि उत्तरी कोरिया, अन्तर महाद्वीपीय बै...

अमेरिका खत्म हो रहा है, बाइडेन ने एक साल के अंदर जितना नुकसान अमेरिका को पहुंचाया है उतना किसी ने भी नहीं पहुंचाया हैः ट्रम्प

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि जो बाइडेन के नेतृत्व में अमेरिका खत्म हो जायेगा। डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि डेमोक्रेट्स विद्रोह के प्रयास थे और वे हमें वाइट हाउस से बाहर करना चाहते थे यहां तक कि मेरे वाइट हाउस में प्रवेश करने से पहले ही वे जाली अध्ययन कराके मुझे नुकसान पहुंचाना चाहते थे। उन्होंने बाइडेन सरकार की नीतियों की आलोचना की और दोबारा राष्ट्रपति बनने के कारणों के बारे में कहा कि बड़ी सीधी सी बात है हमारे देश का पतन हो रहा है और हमारा क्रिया- कलाप असाधारण था। डोनाल्ड ट्रम्प ने 6 जनवरी 2020 को अमेरिकी कांग्रेस पर होने वाले हमले के बारे में कहा कि इस समय होने वाली जांच पड़ताल और विरोधी पार्टियों की ओर से होने वाले हमले कोई नई बात नहीं हैं, वे विद्रोह करवाना चाहते और वाइट हाउस से मुझे मेरे कार्यालय से बाहर निकलवाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि जाली जांच पड़ताल के माध्यम से वे वाइट हाउस में हमारे प्रवेश से पहले हमें आघात पहुंचाने की चेष्टा में थे और वे हमेशा यह कार्य अंजाम दे रहे हैं और हमेशा यह काम करेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा देश पतन की ओर अग्रसर है और हम अमेरि...

राष्ट्रपति रईसी ने दी राष्ट्रपिता की मज़ार पर हाज़िरी

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राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी अपने मंत्रीमण्डल के साथ देश के राष्ट्रपिता की मज़ार पर उपस्थित हुए। इस्लामी क्रांति की 43वीं वर्षगांठ के अवसर पर राष्ट्रपति इब्राहमी रईसी ने पूरे मंत्रीमण्डल के साथ स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी के मज़ार पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की।  उन्होंने इस्लामी क्रांति के संस्थापक स्वर्गीय इमाम खु़मैनी के मज़ार पर फूल चढाएं और फातेहा ख़ानी की। 43 साल पूर्व पहली फरवरी 1979 को स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी कई वर्षों के निष्कासन के बाद स्वदेश वापस आए थे जिसका जनता ने हार्दिक स्वागत किया था।  इमाम ख़ुमैनी के ईरान में प्रवेश के दसवें दिन अर्थात 11 फरवरी 1979 को इस्लामी क्रांति सफल हुई थी। इस बात के दृष्टिगत ईरान में पहली फरवरी से लेकर ग्यारह फरवरी के बीच के दिनों को स्वतंत्रता प्रभात के नाम से जाना जाता है।  इस दस दिनों के दौरान पूरे ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।

भारत को संवैधानिक रूप में हिंदु राष्ट्र घोषित किया जाएः संतों की मांग

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प्रयागराज में आयोजित होने वाली धर्म संसद में संतों ने मांग की है कि भारत को संवैधानिक रूप में हिंदू राष्ट्र घोषित कर दिया जाए। प्रयागराज में आयोजित होने वाली इस धर्म संसद में कहा गया है कि सभी लोग आज से ही "हिंदू राष्ट्र भारत" लिखने लगें। संचार माध्यमों के अनुसार इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती ने भारत के हिंदुओं को संबोधित करते हुए कहा है कि सरकार माने या न माने किंतु हम लोग अभी से "हिंदु राष्ट्र भारत" लिखना आरंभ कर दें।  उन्होंने कहा कि अंत में सरकार को संतों और आम लोगों के दबाव में आकर झुकना पड़ेगा। संतों द्वारा भारत में मुसलमानों के अल्पसंख्यक दर्जे को समाप्त करने की भी मांग की गई।  इस संसद में पारित प्रस्ताव में धर्मांतरण करवाने पर फासी की सज़ा का प्रावधान है। संतों ने सरकार से यह मांग की है कि स्वामी नरसिम्हानंद गिरि और जीतेन्द्र त्यागी जी को तत्काल स्वतंत्र किया जाए।  कार्यक्रम में आनंद स्वरूप ने यह भी कहा है कि इन दोनों को अगर एक सप्ताह के भीतर स्वतंत्र नहीं किया गया तो फिर भगत सिंह के असेंब्ली कांड जैसा ही कुछ हो सकता है। कार्यक्रम में...

मोदी सरकार ने की वादाखिलाफी, किसान सोमवार को मनाएंगे विश्वासघात दिवसः राकेश टिकैत

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भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने दावा किया कि 9 दिसंबर को सरकार द्वारा किए गए वादों के एक पत्र के आधार पर दिल्ली की सीमाओं पर एक साल से अधिक समय से चल रहे विरोध प्रदर्शन को वापस ले लिया गया था, लेकिन वादे अधूरे रह गए। राकेश टिकैत ने केंद्र पर किसानों से किए गए वादों को पूरा न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सोमवार को कृषि मुद्दों पर देशभर में विश्वासघात दिवस मनाया जाएगा। राकेश टिकैत ने एक ट्वीट में कहा कि सरकार द्वारा किसानों से वादाखिलाफी के खिलाफ 31 जनवरी को देशव्यापी "विश्वासघात दिवस" मनाया जाएगा। सरकार के नौ दिसंबर के जिस पत्र के आधार पर आंदोलन स्थगित किया गया था, सरकार ने उनमें से कोई वादा पूरा नहीं किया है। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लेने की मुख्य मांगों को लेकर नवंबर 2020 में किसानों ने संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। किसानों ने फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी सहित अन्य मांगों पर एक साल से अधिक समय तक सिंघू, टीकर...

बदल गया भारत, गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को श्रद्धांजलि, कालीचरण सम्मानित

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भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के मौक़े पर रविवार को हिंदू महासभा ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर में उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे और गांधी की हत्या मामले में एक अन्य आरोपी नारायण आप्टे को श्रद्धांजलि दी। हिंदू महासभा ने इस दिन को गोडसे-आप्टे स्मृति दिवस के रूप में मनाया। इस अवसर पर हिंदू महासभा ने ग्वालियर के दौलतगंज स्थित अपने दफ्तर में आयोजित कार्यक्रम में भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को अपशब्द कहने वाले हिंदू धर्म गुरु कालीचरण महाराज सहित पांच कार्यकर्ताओं को ‘गोडसे-आप्टे स्मृति भारत रत्न सम्मान’ दिया। कालीचरण ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में धर्म संसद के दौरान गांधी के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। गांधी के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में महाराष्ट्र की ठाणे पुलिस ने कालीचरण को 19 जनवरी को छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार किया था। इस मौके पर हिंदू महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. जयवीर भारद्वाज ने बताया कि हमने पाकिस्तान का भारत के साथ एकीकरण करने यानी अखंड भारत का संकल्प लेते हुए भारत माता की आरती की। हम 30 जनवरी 1948 को उनकी गिरफ्तारी पर गुस्सा ज़ाहिर करन...

पेगासस जासूसी मुद्दा, केन्द्र पर भड़के विपक्षी दल

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कांग्रेस ने रविवार को लोकसभा में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने के लिए एक नोटिस दिया है, ऐसा ही नोटिस राज्यसभा में भी दिया जाएगा। लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी ने पेगासस मुद्दे पर संसद के निचले सदन को कथित रूप से गुमराह करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने की मांग की है। ज्ञात रहे कि राजनेताओं, पत्रकारों, न्यायाधीशों और कार्यकर्ताओं की जासूसी करने के लिए इस्राईल स्पायवेयर पेगासस का कथित तौर पर सरकार द्वारा इस्तेमाल किए जाने से जुड़ीं रिपोर्ट के संबंध में पिछले साल 19 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के उद्घाटन के दिन अश्विनी वैष्णव ने दोनों सदनों को बताया था कि ये रिपोर्ट सनसनी पैदा करने वाली और भारतीय लोकतंत्र और इसकी अच्छी तरह से स्थापित संस्थाओं को बदनाम करने का प्रयास थीं। कांग्रेस नेता चौधरी ने अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ में प्रकाशित उस रिपोर्ट के बाद रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा, जिसमें दावा किया गया है कि भारत सरकार ने हथि...

ममता बनर्जी ने राज्यपाल धनखड़ को ब्लॉक कर दिया

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्विटर पर राज्यपाल जगदीप धनखड़ को ब्लॉक कर दिया है। हालिया दिनों में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल अपने ट्वीट्स के ज़रिए लगातार सरकार और मुख्यमंत्री पर हमले करते रहे हैं। सोमवार को ममता बनर्जी ने ख़ुद इसकी जानकारी दी। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में कहाः मैंने राज्यपाल को ट्विटर पर ब्लॉक कर दिया है। क्योंकि उन्हें ऐसा करने पर मजबूर होना पड़ा है। सोमवार को ट्विटर ऐसी चर्चा भी थी कि ममता बनर्जी द्वारा ब्लॉक किए जाने के बाद धनखड़ ने व्हाट्सएप पर उन्हें मैसेज दिया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री का कहना था कि राज्यपाल के पास कई फ़ाइलें और विधेयक लंबित हैं। मैंने उनसे मुलाक़ात कर इस मुद्दे पर बात की है। लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ। मुख्यमंत्री बनर्जी ने आरोप लगाया कि राज्यपाल धनखड़ के अड़ियल रवैये के कारण सरकार के कई काम अटके पड़े हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इसकी जानकारी दी गई थी। लेकिन इसका भी कुछ फ़ायदा नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्यपाल पुलिस और प्रशासन के तमाम शीर्ष अधिकारियों को राजभवन बुला कर डरा रहे हैं। हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाध...

विधानसभा चुनावों के लिए नई गाइडलाइंस जारी, चुनावी रैलियों और रोड शो पर अब 11 फ़रवरी तक प्रतिबंध

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पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए अब चुनाव आयोग ने नई गाइडलाइंस जारी की हैं। चुनाव आयोग ने अब 11 फ़रवरी तक चुनावी रैलियों और रोड शो पर रोक लगा दी है। हालांकि, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए आयोग ने कुछ छूट भी दी है। अब 1000 लोगों के साथ राजनीतिक रैली, इनडोर मीटिंग में 500 लोग और डोर टू डोर कैम्पेन में 20 लोग शामिल हो सकेंगे। इनडोर मीटिंग के लिए अब अधिकतम 500 लोगों को अनुमति होगी, या हॉल की क्षमता का 50 फ़ीसदी ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसी के साथ राज्‍य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा तय की गई क्षमता का पालन राजनीतिक दलों को करना होगा। पहले ये संख्या 300 लोगों की थी। इसके अलावा खुली जगहों पर होने वाली बैठकों में ज़्यादा से ज़्यादा 1000 लोग शामिल हो सकेंगे। पहले यह संख्या 500 की थी। डोर टू डोर कैंपेन में अब 10 की जगह 20 लोग शामिल हो सकेंगे। बता दें कि 5 राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 10 फ़रवरी को शुरू होगा और नतीजों की घोषणा 10 मार्च को की जाएगी।

भारत की संसद में नया बजट पेश, ख़ास ख़ास बातों पर एक नज़र

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भारत की मोदी सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्तीय वर्ष 2022-23 का आम बजट पेश किया। सोमवार को आर्थिक सर्वेक्षण जारी किया गया, जिसमें इस साल जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 9.2% रखा गया है। भारतीय वित्त मंत्री का कहना था कि उनकी सरकार समावेशी विकास के पथ पर आगे बढ़ रही है,वित्त मंत्री ने कहा कि इस साल भारत की अर्थव्यवस्था में वृद्धि दर का अनुमान 9 फ़ीसदी से भी ऊपर है और यह दुनिया की सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से ज़्यादा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 तक राजस्व घाटा जीडीपी के 4.5% तक पहुँचने की बात कही गई है। 2022/23 में राजस्व घाटा जीडीपी का 6.4% रहने का अनुमान है। अगर इंफ़्रास्ट्रक्चर की बात की जाए तो पीएम गति शक्ति में एक्सप्रेसवे के लिए मास्टरप्लान है। इसके तहत 2022-23 में 25, 000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग का विस्तार किया जाएगा। हाईवे विस्तार पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। पहाड़ी क्षेत्रों में पारंपरिक सड़कों के लिए राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम को पीपीपी मोड में लिया जाएगा, इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। डिज़िटल यूनिवर्सिटी भी बनाई जाएगी जहां अलग-अलग भारतीय भाषाओं में पढ़ाई होग...

मस्जिदुल अक़सा के मुफ़्ती का बयान, आज़ाद होकर रहेगा बैतुल मुक़द्दस

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मस्जिदुल अक़सा के इमाम का कहना है कि बैतुल मुक़द्दस आज़ाद होगा और फ़िलिस्तीनी जनता अलर्ट है। फ़िलिस्तीन की सफ़ा न्यूज़ एजेन्सी की रिपोर्ट के अनुसार मस्जिदुल अक़सा के इमाम अकरमा सब्री ने अपने एक बयान में कहा कि ओसलो समझौता वास्तव में बैतुल मुक़द्दस को वेस्ट बैंक से अलग करने के लिए था, इसलिए इस समझौते से पहले फ़िलिस्तीनी जनता वेस्ट बैंक और ग़ज़्ज़ा से आसानी के साथ मस्जिदुल अक़सा आ सकते थी किन्तु इस समझौते के बाद रास्ते बंद हो गये। उन्होंने कहा कि बैतुल मुक़द्दस को निशाना बनाने का मक़सद फ़िलिस्तीन के साथ इस्लामी जगत के संपर्क को तोड़ना था इसीलिए बैतुल मुक़द्दस और मस्जिदुल अक़सा का अस्तित्व, मुसलमानों की फ़िलिस्तीनियों के साथ संपर्क का कारण है। मस्जिदुल अक़सा के इमाम ने कहा कि मस्जिदुल अक़सा, इस्लामी और फ़िलिस्तीनी पहचान की वजह से हमेशा इस्राईल के हमलों के निशाने पर रहा है इसीलिए इस्राईल इस पहचान को ख़त्म करना चाहता था।

यूक्रेन में ज़ायोनी शासन का दूतावास बंद

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यूक्रेन में ज़ायोनी शासन के दूतावास को वेतन के भुगतान और महीनों से जारी विवाद के बाद बंद कर दिया गया है। यह पहली बार नहीं है, जब किसी देश में ज़ायोनी शासन के दूतावास को बंद किया गया हो। इससे पहले भी कई बार ज़ायोनी शासन के राजनयिक और सैन्य अधिकारी प्रतिकूल वित्तीय परिस्थितियों के कारण, काम से हाथ खींच चुके हैं। पिछले 30 वर्षों के दौरान, ज़ायोनी विदेश मंत्रालय के कर्मचारी अपने मासिक वेतन का एक हिस्सा, बैठकों, यात्राओं और परिवहन और घरों के रखरखाव के लिए बिना दस्तावेज़ के प्राप्त करते रहे हैं। लेकिन अब इस्राईल के वित्त मंत्रालय ने घोषणा की कि नई व्यवस्था प्रणाली के तहत, राजनयिकों को बिना दस्तावेज़ के कोई भुगतान नहीं किया जाएगा। इस्राईली अख़बार यदिओत अहारनोत की रिपोर्ट के मुताबिक़, यूक्रेन की राजधानी कीव में स्थित ज़ायोनी दूतावास को अगले नोटिस तक के लिए बंद कर दिया गया है। इस्राईली प्रधान मंत्री नफ़्ताली बेनेत ने पद संभालने से पहले इस्राईल की आर्थिक स्थिति के बारे मं चेतावनी देते हुए कहा था कि ज़ायोनी शासन बहुत ही भयानक दिशा में आगे बढ़ रहा है और आर्थिक पतन की कगार पर है। 

जेल से फरार हुए दाइश के 400 आतंकी, अभी तक कोई ख़बर नहीं

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सीरिया के डेमोक्रेटिक कुर्द बलों ने अब यह बात स्वीकार की है कि उनके नियंत्रण वाली जेल से 400 दाइशी भाग निलकले हैं। अरबी-21 चैनेल के अनुसार सीरिया डेमोक्रेटिक कुर्द बलों के एक कमांडर नोरूज़ अहमद ने बताया है कि दाइश के 400 आतंकी जेल से फरार हैं जिनमें से कुछ बहुत ख़तरनाक हैं। उन्होंने बताया कि अस्सनाआ जेल पर किये गए हमले में दाइश के लगभग 347 सदस्य मारे गए जबकि 400 आतंकी भाग निकलने में सफल रहे।  नोरूज़ अहमद के अनुसार जेल पर हुए दाइश के हमले में कुर्द बलों के 100 सदस्य ही मारे गए। हालांकि स्वतंत्र सूत्रों का कहना है कि जेल भागने वाले दाइश के आतंकियों की संख्या इससे कही अधिक है जितनी कुर्द बलों के कमांडर ने बताई है।  स्थानी सूत्रों के अनुसार जेल पर दाइश के हमले के बाद वहां पर अफरा-तफरी मच गई और इस स्थिति का लाभ उठाते हुए लगभग 750 दाइशी बंदी वहां से भाग निकले। ज्ञात रहे कि 21 जनवरी को दाइश के आतंकवादियों ने सीरिया के हसका में स्थित अस्सनाआ जेल पर धावा बोल दिया था जिसके बाद कुर्द डेमोक्रेटिक बलों के साथ उनकी झड़प हुई थी इसी दौरान हमला करने वाले दाइश के कुछ आतंकवादियों ने जेल में घुसक...

इस्राईल से भाग जाने के चक्कर में हैं 59 प्रतिशत इस्राईली

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एक सर्वेक्षण से पता चला हे कि 59 प्रतिशत इस्राईली, इस्राईल छोड़कर भागना चाहते हैं। ताज़ा सर्वेक्षण बताते हैं कि बिगड़ती आर्थिक स्थति, फ़िलिस्तीन संकट के समाधान और अपने भविष्य के प्रति निराश होकर बहुत से इस्राईली, वहां से कहीं और जाना चाहते हैं। राय अलयौम समाचारपत्र के अनुसार बेगिन नामक संस्था की ओर से कराए गए सर्वेक्षण के परिणाम बताते हैं कि 59 प्रतिशत इस्राईलियों ने इस्राईल को छोड़ने के लिए बहुत से दूतावासों से संपर्क किया है जबकि दूसरे भी कई एसा ही करना चाहते हैं।  इसी के साथ 78 प्रतिशत इस्राईली परिवार चाहते हैं कि उनके बच्चे इस्राईल छोड़कर कहीं और चले जाएं। एक इस्राईली समाचारपत्र मआरयो के एक स्तंभकार कालमान लीब्सकेन्द लिखते हैं कि हम इस्राईल में दक्षिपपंथी सोच के विकसित होने से चिंतित हैं क्योंकि उनका ध्यान इस्राईल की ओर बहुत कम है।  यह कट्टरपंथी लोग केवल अपनी विचारधारा को ही महत्व देते हैं दूसरों को नहीं।  उनके अनुसार यह वे लोग हैं जिनकों विदेश से पैसा मिलता है। याद रहे कि इससे पहले भी इस्राईल से उल्टे पलायन की बहुत सी ख़बरे आती रही हैं।  बहुत से इस्राईली जो वहां...

हमास ने किया एमनेस्टी इंटरनैश्नल की रिपोर्ट का स्वागत

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फ़िलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोध आन्दोलन ने एमनेस्टी इंटरनैश्नल की रिपोर्ट को स्वागत योग्य बताया है। फ़िलिस्तीनियों के विरुद्ध ज़ायोनी शासन के अत्याचार जारी हैं।  इन्हीं अत्याचारों को लेकर एमनेस्टी इन्टरनैश्नल ने ज़ायोनी अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की बात कही है। फ़ार्स न्यूज़ के अनुसार हमास के मीडिया प्रभारी हेशाम क़ासिम ने कहा कि एमनेस्टी इंटरनैश्नल का यह प्रयास सराहनीय है कि फ़िलिस्तीनियों के विरुद्ध ज़ायोनी शासन के अत्याचारों की एक लिस्ट तैयार करके उसके विरुद्ध कार्यवाही की जाए। हेशाम क़ासिम ने कहा कि यह रिपोर्ट वास्तव में फ़िलिस्तीनियों की उन परेशानियों को उजागर करने वाली है जो उनको अवैध ज़ायोनी शासन के अत्याचारों से मिली हैं।  यह रिपोर्ट फिलिस्तीनियों के विरुद्ध ज़ायोनियों के वर्षों से चले आ रहे अत्याचारों को बताती है। याद रहे कि एमनेस्टी इंटरनैश्नल ने हालिया दिनों में एक रिपोर्ट तैयार करके फ़िलिस्तीनियों के विरुद्ध ज़ायोनी शासन के अत्याचारों की निंदा की है।  उसने ज़ायोनी शासन को मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन करने वाला शासन बताया है।

यूक्रेन पर हमले को लेकर सुरक्षा परिषद में भिड़े अमरीका और रूस

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यूक्रेन संकट को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस और अमरीका के बीच खुलकर टकराव देखने में आया है। रूस ने बड़ी संख्या में यूक्रेन की सीमा पर अपने सैनिक तैनात कर दिए हैं और ऐसा माना जा रहा है कि रूस, यूक्रेन पर हमला कर देगा, जिसका अमरीका विरोध कर रहा है। यूक्रेन पर रूस के हमले की आशंका के मद्देनज़र इस मुद्दे पर चर्चा के लिए अमरीका ने सुरक्षा परिषद की बैठक का आहवान किया था, जिसमें दोनों देशों के राजदूत आपस में भिड़ गए। बैठक में अमरीकी राजदूत लिंडा थॉमस ग्रीनफ़ील्ड ने कहा कि जिस तरह से रूस ने यूक्रेन की सीमा पर अपने सैनिकों को तैनात कर रखा है, वह यूरोप में अपने तरह की सबसे बड़ी तैनाती है। दशकों बाद ऐसा देखा गया है। इस पर उनके रूसी समकक्ष ने अमरीका पर उन्माद फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अमरीका रूस के मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है, जिसे किसी भी क़ीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इस बीच, अमरीका और ब्रिटेन ने धमकी दी है कि अगर रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो वे उस पर और प्रतिबंध लगा देंगे। ब्रिटेन के विदेश मंत्री लिज़ ट्रस ने कहा कि इस संबंध में क़ानून तैयार किया जा रहा है, जिसस...

यूक्रेन पर रूस के हमले की ख़बर क्या अमरीका का प्रोपैगंडा है?

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सोमवार को अमरीका के आहवान पर यूक्रेन संकट को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें रूस और अमरीका के बीच खुलकर टकराव देखने में आया और रूसी और चीनी प्रतिनिधियों ने युद्ध भड़काने वाली अमरीका की नीतियों की जमकर आलोचना की। इस बैठक में अमरीका द्वारा यूक्रेन पर रूस के हमले की संभावना जताए जाने की चीनी और रूसी राजनयिकों ने कड़ी निंदा की और कहा कि वाशिंगटन ने अभी तक यूक्रेन पर रूस के हमले की योजना के अपने दावे के लिए कोई भी दस्तावेज़ पेश नहीं किया है और युद्ध भड़कने वाले बयान, ख़याली पुलास से ज़्यादा कुछ नहीं हैं।    रूस ने बड़ी संख्या में यूक्रेन की सीमा पर अपने सैनिक तैनात कर रखे हैं, इसलिए अमरीका और पश्चिमी देश ऐसा प्रोपैगंडा कर रहे हैं कि रूस, यूक्रेन पर हमला कर सकता है। इस बात को अधिक गंभीर रूप से पेश करने के लिए वाशिंगटन और लंदन ने मास्को के ख़िलाफ़ कड़े प्रतिबंध लगाने की धमकी भी दी है। अमरीका ने सुरक्षा परिषद की बैठक के आयोजन के लिए यूक्रेन की सीमा पर रूस द्वारा बड़ी संख्या में सैनिकों को तैनात करना बताया था। व्हाइट हाउस का दावा है कि यूक्रेन की सी...

ब्रिटिश प्रधानमंत्री बेशर्म आदमी हैं, उन्हें इस्तीफ़ा देना चाहिए, ब्रिटिश विपक्ष

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कोरोना महामारी की पाबंदियों के बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के सरकारी आवास टैन डाउनिंग स्ट्रीट में हुई पार्टी को लेकर बोरिस जॉनसन ने संसद में माफ़ी मांगी है। लेकिन विपक्षी लेबर पार्टी ने प्रधानमंत्री को बेशर्म इंसान बताते हुए उनसे इस्तीफ़े की मांग की है। प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने संसद में कहा कि वह रिपोर्ट की पड़ताल को स्वीकार करते हैं और यह मानते हैं कि उनकी तरफ़ से ग़लती हुई है। जॉनसन ने अपनी सफ़ाई में कहा है कि अब वह डाउनिंग स्ट्रीट और कैबिनेट ऑफ़िस को चलाने के तरीक़े में बदलाव कर रहे हैं, जिससे चीज़ें सुधरेंगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में उनका सिर्फ़ माफ़ी मांग लेना ही काफ़ी नहीं है। दूसरी तरफ़ विपक्ष ने प्रधानमंत्री को बेशर्म बताते हुए इस्तीफ़े की मांग की है। लेबर पार्टी के नेता कीर स्टार्मर पहले भी बोरिस जॉनसन के इस्तीफ़े की मांग कर चुके हैं।

म्यांमार के वरिष्ठ अदालती अधिकारियों पर अमरीका, ब्रिटेन और कैनेडा ने लगाई पाबंदी

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अमरीका, ब्रिटेन और कैनेडा ने म्यांमार में होने वाली फ़ौजी बग़ावत का एक साल पूरा होने पर न्यायपालिका के वरिष्ठ अधिकारियों पर पाबंदी लगा दी है। रोयटर्ज़ के अनुसार अमरीकी वित्त मंत्रालय ने एटार्नी जनरल थेडाओ, सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस टनटन ओ, चेयरमैंन एंटी करप्शन कमीशन यूटनओ के ख़िलाफ़ पाबंदिया लगा दी हैं। अमरीकी वित्त मंत्रालय का कहना है कि यह सारे लोग लोकतंत्र समर्थक नेता आन सान सूची के ख़िलाफ़ राजनैतिक कारणों से होने वाली क़ानूनी कार्यवाहियां में लिप्त हैं। अमरीका के विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन ने अपने बयान में कहा कि हम विश्व समुदाय की ओर से बर्मा के लोगों के समर्थन का एलान करने और बग़ावत और वर्तमान अधिकारियों की हिंसा के ख़िलाफ़ कार्यवाही को प्रोत्साहित करने के लिए पाबंदियों के मामले पर ब्रिटेन और कैनेडा के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। ब्रिटेन की विदेश मंत्री लिज़ ट्रस ने अपने बयान में कहा कि म्यांमार की सैनिक सरकार म्यांमार के लोगों को आतंकित करके दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन हमेशा आज़ादी, लोकतंत्र और क़ानून की प्रभुसत्ता के पक्ष में काम करेगा, हम अन्य राष्ट्रों...

ताइवान को लेकर अमरीका से हमारा युद्ध हो सकता हैः चीन

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अमरीका में चीन के राजदूत ने चेतावनी दी है कि ताइवान पर बीजिंग और वाशिगटन के मतभेद युद्ध का कारण बन सकते हैं। कीन कांग ने वाशिगटन में अपने एक इन्टरव्यू में कहा है कि संयुक्त राज्य अमरीका की कार्यवाहियों के परिणाम में ताइवान के अधिकारी दुस्साहसी हो जाते हैं तो फिर अमरीका के साथ हमारी सैन्य झड़प की संभावना बहुत अधिक जो जाएगी। इससे पहले भी चीन, ताइवान को लेकर अमरीका को कई बार सचेत कर चुका है।  अमरीका में मौजूद चीन के राजदूत ने इसके साथ यह भी कहा है कि उनका देश, संकट के शांतिपूर्ण समाधान का इच्छुक है। याद रहे कि नवंबर 2021 में चीन के राष्ट्रपति शी जिन पिंग ने अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को संबोधित करते हुए कहा था कि जो भी ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन करेगा वह आग के साथ खेलेगा। उल्लेखनीय है कि बीजिंग, ताइवान को अपना अटूट हिस्सा मानता है।  यही कारण है कि अमरीका द्वारा ताइवान को हथियारे बेचने और उकसाने वाली कार्यवाही को बीजिंग, चीन की संप्रभुता के विरुद्ध मानता है।  हालांकि अमरीका लगातार ताइवान की सैन्य सहायता कर रहा है जिससे चीन बहुत नाराज़ है।

संयुक्त राष्ट्रसंघ ने म्यामार में सेना द्वारा की गई कार्यवाही पर गंभीर चिंता जताई है।

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म्यांमार के बारे में संयुक्त राष्ट्रसंघ के विशेष दूत नोएलीन हेज़र ने कहा है कि म्यांमार की स्थति लगातार अस्थिर होती जा रही है।  उन्होंने कहा कि वहां पर आम लोगों पर हमलों से चिंताओं को अधिक बढ़ा दिया है। राष्ट्रसंघ के विशेष दूत का कहना है कि म्यांमार के आधे से अधिक लोग इस समय निर्धन्ता में ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं।  उनका कहना था कि एक अनुमान के हिसाब से एक करोड़ चालीस लाख से अधिक लोगों को तत्काल मानवताप्रेमी सहायता की ज़रूरत है। उल्लेखनीय है कि पहली फरवरी 2021 को म्यांमार में सेना से विद्रोह करके वहां की सरकार को गिरा दिया था।  उस दिन से अबतक आधिकारिक रूप में म्यांमार में कम से कम 500 आम लोग मारे गए हैं।  इसी बीच 11800 लोगों को जेलों में डाल दिया गया है। हालांकि सेना की दमनात्मक कार्यवाहियों के बावजूद म्यांमार में विरोध का क्रम अब भी जारी है।  वर्तमान समय में म्यांमार की सैन्य सरकार के बहुत से विरोधी गुट, वहां के सशस्त्र गुटों से जा मिले हैं जो सेना से टकराते रहते हैं। विशेष बात यह है कि म्यांमार की सेना अपनी हिंसक कार्यवाहियों के लिए बदनाम है।  इससे पहले म्या...

अनेकता में एकता हो गया..

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73वें गणतंत्र दिवस की झलकियां

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बुधवार को भारत अपना 73वां गणतंत्र दिवस समारोह मना रहा है. हर बार से अलग इस बार का गणतंत्र दिवस कई मायनों में कुछ नए बदलावों के साथ मनाया जा रहा है. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले इंडिया गेट के पास बने नेशनल वॉर मेमोरियल जाकर पुष्पांजलि अर्पित की. उसके बाद उन्होंने देश की तीनों सेनाओं के अध्यक्षों समेत देश के रक्षा मंत्री से भेंट की और उनका अभिवादन किया. इसके बाद देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का काफ़िला राजपथ पहुंचा, जहां पीएम मोदी ने राष्ट्रपति का अभिवादन किया. आज़ादी के 75वें साल में हो रहे इस बार के गणतंत्र दिवस में कई बदलाव किए गए हैं. केंद्र सरकार 'आज़ादी का अमृत महोत्सव' मना रही है, लिहाज़ा इस गणतंत्र दिवस को ख़ास बनाने की पूरी कोशिश की जा रही है.

भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति का बड़ा बयान, कहा देश में असहनशीलता और असुरक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है

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भारत के पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। हामिद अंसारी ने 26 जनवरी को भारतीय अमेरिकी मुस्लिम काउंसिल के एक वर्चुअल कार्यक्रम में बोलते हुए चुनावी बहुमत को परोक्ष रूप से धार्मिक बहुमत और राजनीतिक एकाधिकार से हासिल हुआ बहुमत बताया। उन्होंने कहा कि देश में असहिष्णुता, अशांति और असुरक्षा बढ़ी है। हामिद अंसारी  का कहना था कि भारत में क़रीब 20 प्रतिशत लोग धार्मिक अल्संख्यक हैं, हालिया वर्षों में  अलग तरह की प्रवृतियाँ और व्यवहार देखने में आया है जो नागरिक राष्ट्रवाद के पहले से स्थापित सिद्धांत पर विवाद करते हैं और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के एक नए और काल्पनिक सिद्धांत को जोड़ते हैं। पूर्व उप राष्ट्रपति ने कहा कि यह एक धार्मिक बहुमत और एकाधिकार वाली राजनीतिक शक्ति की आड़ में चुनावी बहुमत पेश करना चाहता है, यह नागरिकों को उनके विश्वास के आधार पर अलग करना चाहता है, असहिष्णुता, अशांति और असुरक्षा को बढ़ावा देना चाहते हैं। हामिद अंसारी ने कहा कि हाल में हुईं इसकी कुछ अभिव्यक्तियां डराने वाली हैं और क़ानून के शासन के दावे को कमजोर करती हैं, ये एक ऐसा सवाल ह...

पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में फिर उठाया कश्मीर का मुद्दा

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पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में फिर उठाया कश्मीर का मुद्दा कहा वहां बहुत ज़ुल्म हो रहा है, जल्द नोटिस लिया जाए! भारत ने भी दिया जवाब पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद पर ज़ोर दिया कि वह भारत नियंत्रित कश्मीर में भारत के ज़ुल्म के सुबूतों का नोटिस लेते हुए इन अपराधों के ज़िम्मेदार भारतीय अफ़सरों और कर्मियों से जवाब तलब करे। सुरक्षा परिषद में भाषण देते हुए पाकिस्तान के राजदूत मुनीर अकरम ने आरोप लगाया कि भारत ने अफ़ग़ानिस्तान की धरती का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान पर होने वाले हमलों में आर्थिक मदद और आतंकी सहयोग किया। मुनीर अकरम ने कहा कि भारत पाकिस्तानी सेना और नागरिकों पर हमले करने के लिए उन आतंकी संगठनों की मदद कर रहा है जो संयुक्त राष्ट्र की ब्लैक लिस्ट में शामिल हैं। पाकिस्तान के बयान पर जवाब देते हए भारत ने कहा कि पाकिस्तान कुछ भी समझता रहे जम्मू व कश्मीर और लद्दाख़ भारत का अटूट अंग है। वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान ने भारत के इस बयान के जवाब में कहा कि आतंकवाद को भारत से बढ़ावा मिल रहा है। इस बहस में संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने कहा कि हम कश्मीर में ...

छात्रों के आन्दोलन का कांग्रेस ने किया समर्थन

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आरआरबी एनटीपीसी रिजल्ट 2021 के विरोध में छात्र 28 जनवरी को भारत में देश व्यापी आन्दोलन करने जा रहे हैं।  संचार माध्मयों के अनुसार भारत में होने जा रहे इस रेल रोको आंदोलन को कांग्रेस ने खुलकर अपना समर्थन दे दिया है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में इसकी घोषणा की।  उन्होंने कहा कि कल 28 तारीख को रेल रोको आंदोलन आयोजित किया गया है, हम इसको समर्थन देते हैं। कांग्रेस मुख्‍यालय में संवाददाताओं से बात करते हुए पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि जैसा कि राहुल गांधी ने भी कहा है कि ये गांधी का देश है जो सत्‍य और अहिंसा से चलता है। शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करेंगे तो सरकार को घुटने टेकने पड़ेंगे।  इसका सबसे बड़ा उदाहरण किसान आंदोलन है।  किसी भी अभियान या आंदोलन में लेशमात्र भी हिंसा की जगह नहीं है। उन्‍होंने कहा कि हम सरकार से यह कहना चाहते हैं कि बड़े-बड़े वादे करने के बाद उन्‍हें पूरा न करके आप वादाखिलाफी, केवल देश के साथ ही नहीं बल्कि देश के युवाओं के साथ भी कर रहे हैं। उनका कहना था कि युवाओं को सिर...